ओलंपिक खेलों का आयोजन कोई सस्ता सौदा नहीं, चुकानी होती है बड़ी कीमत

by Siddharth Chaturvedi Jul 28, 2021 • 03:23 PM Views 971

ओलंपिक खेलों का आयोजन कोई सस्ता सौदा नहीं है। कहने को ये खेल है लेकिन असलियत में ये अरबों डॉलर का मामला है। ओलिंपिक के आयोजन का खर्चा लगातार बढ़ते हुए अब किसी छोटे देश की समूची अर्थव्यवस्था के बराबर का हो गया है। टोक्यो ओलंपिक की ही बात करें तो इसका बजट क़रीब 7 अरब डॉलर था लेकिन असल खर्चा बढ़ कर क़रीब क़रीब 30 अरब डॉलर तक पहुँच गया है। अगर जानकारों की माने तो इस खर्चे का लम्बे समय में कोई फायदा नहीं होता है।

मेजबान शहर को खेलों के आयोजन स्थल, इंफ्रास्ट्रक्चर, श्रमशक्ति और मनोरंजन के लिए अरबों डॉलर खर्च करने पड़ते हैं और इसके लिए उसे इंटरनेशनल ओलंपिक समिति के साथ अनुबंध करना होता है। ओलंपिक खेलों के आयोजन के लिए IOC के समक्ष बोली लगती है जिसमें बोली लगाने वाले बताते हैं कि वह कितना खर्चा करेंगे।

सबसे ऊंची बोली लगाने वाला जो रकम दिखाता है, अंत में जा कर वास्तव में उससे कई गुना ज़्यादा खर्चा हो जाता है। टोक्यो ओलंपिक की बात करें तो 2013 में उसने 2020 के आयोजन की बोली जीती थी। अब इन खेलों के आयोजन का वास्तविक खर्चा 30 अरब डॉलर बताया जा रहा है जबकि टोक्यो ने 2013 में क़रीब 7 अरब डॉलर की बोली लगाई थी।