'आईपीएल' एक खेल की राजनीति

by GoNews Desk Sep 21, 2020 • 11:31 AM Views 2184

आईपीएल में सनसनी फैली हुई है। टाइटल स्पॉन्सर चीनी कम्पनी है भारत में विरोध हो रहा है और अब वीवो के पीछे हटने की ख़बर आ रही है। आईपीएल का टाइटल स्पॉन्सर वीवो पीछे हट गया है। यानी 440 करोड़ रुपय का नुक़सान लेकिन बाक़ी चीनी कंपनीयों का क्या जिन्होंने इंडायरेक्ट तरीक़े से आईपीएल में पैसा लगा रखा है। 

भारत में क्रिकेट में अथाह पैसा है और बात आईपीएल की हो तो यहाँ धन वर्षा है। क्रिकेट का खेल रोमांचक है लेकिन इसमें पैसे का जो खेल है वो अधिक रोमांचक है। खेल में पैसा है इसलिए इसमें राजनीति का खेल है और खेल में राजनीति है। नेता अभिनेता और खिलाड़ी कब कहाँ एक दूसरे से टकराते हैं पता नहीं चलता। जनता धूम-धड़ाके से ख़ुश होती है ताली बजाती है और खेल के पीछे हुए खेल से बेख़बर सो जाती है। अगले दिन फिर अपनी फ़ेवरेट टीम को चीयर करने के लिए स्टेडीयम, टीवी, लैप्टॉप और मोबाइल हर जगह की ख़ाक छान लेते हैं ।  

आईपीएल की मीडिया राइट्स से 2018 से अब तक तीन हज़ार तीन सौ करोड़ रुपय बीसीसीआई को मिले हैं। सपॉन्सर्शिप से सात सौ करोड़ रुपय मिले हैं। सिर्फ़ वीवो ने ही 440 करोड़ रुपय दिए हैं। इतने पैसे को अलग-अलग टीमों में बाँटने के बाद बीसीसीआई का मुनाफ़ा हुआ दो हज़ार करोड़ रुपये। 

लेकिन इस बार बॉयकाट आईपीएल ट्रेंड कर रहा है क्यों? क्योंकि इसमें चीन का पैसा लगा है और चीन ने सरहद पर हमारे जवानों को शहीद किया है। इसलिए ख़बर है कि चीनी कम्पनी वीवो की स्पॉन्सर्शिप इस बार ना हो। बीसीसीआई को 2022 तक हर साल 440 करोड़ रुपये दिए जाने की डील थी। अगर इस बार वीवो से पैसे नहीं लिए तो ये डील 2023 तक कर दी जाएगी ऐसी भी ख़बरें हैं। 

आईपीएल इस बार यूएई में करवाए जाने का फ़ैसला किया गया है। 19 सितम्बर से 10 नवम्बर तक दुबई, शारजाह और अबू धाबी में मैच खेले जाएँगे। कोरोना की वजह से पूरी तरह से सोशल डिस्टन्सिंग के नियमों का पालन करते हुए मैच खेले जाएँगे। शुरू के मैचों में दर्शक नहीं रहेंगे। डग आउट एरिया में लिमिटेड खिलाड़ी बैठेंगे। कमेंटेटर छह फ़ीट की दूरी पर रहेंगे।

दुबई इंटर्नेशनल क्रिकेट स्टेडियम, शारजाह क्रिकेट स्टेडीयम और अबू धाबी का शेख़ ज़ाएद क्रिकेट स्टेडीयम तैयार हो रहा है। इनमें से किसी की भी कपैसिटी 25 हज़ार से ज़्यादा की नहीं है लेकिन गेट मनी की परवाह किसे है? दर्शक आयें या ना आएँ। हाँ दर्शकों के रहने से टीवी के लिए माहौल बनता है। कुछ खिलाड़ियों का भी कहना है कि दर्शकों से घनघनाता हुआ स्टेडियम उनमें जोश भर देता है। 

लेकिन अब दर्शकों की जगह पर कैमरा है। उस कैमरे से करोड़ों दर्शकों तक पहुँचा जा सकता है। यही कारण है कि स्पॉन्सर्शिप में साढ़े पाँच सौर फ़ीसदी का उछाल आया है। मौजूदा स्पॉन्सर तो आईपीएल को मालामाल किए हुए है। भले ही वो चीनी कम्पनी है। 

पहले तय किया गया था कि आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सर्शिप से कोई छेड़-छाड़ नहीं की जाएगी लेकिन विरोध बढ़ता गया। और समस्या ये है कि आईपीएल की स्पॉन्सर्शिप में ढेर सारी चाइनीज़ कम्पनी हैं। सरकार ने चीनी एप पर तो रोक लगा दी कुल मिलाकर 59 एप्स पर पाबंदी लगाई गई थी और 275 एप्स पर नज़र रखे जाने की बात की गयी थी। लेकिन सवाल ये उठे की आईपीएल में जो चीनी पैसा लगा हुआ है उसपर रोक नहीं लगनी चाहिए।

आईपीएल की चीनी कम्पनी के स्पॉन्सर्शिप को लेकर सोशल मीडिया पर आईपीएल के फ़ैन नाराज़ हो गए। उनका कहना है की सरहद पर हमारे जवानों का ख़ून बहाने वाले चीन से या चीन की किसी कम्पनी से आईपीएल का कोई सम्बन्ध नहीं होना चाहिए। फ़ैसले के कुछ ही देर बाद बॉयकाट आईपीएल ट्रेंड करने लगा। और अब सीएआईटी ने गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखी कि तुरंत मामले का संज्ञान लाइन और बीसीसीआई को चीनी स्पॉन्सर्शिप के साथ आईपीएल करवाने की इजाज़त ना दें। अमित शाह के बेटे जय शाह जो बीसीसीआई के सचिव हैं उन्होंने तय कर लिया था कि चीनी कम्पनी वीवो से टाइटल स्पॉन्सर्शिप नहीं छीनी जाएगी लेकिन अब ख़बर ये है कि वीवो बाहर हो गया है।