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बाबा रामदेव का कोरोनिल को लेकर दावा फिर ग़लत, डब्ल्यूएचओ ने नहीं दी मान्यता

by GoNews Desk Feb 22, 2021 • 02:28 PM Views 767

पतंजलि का ‘कोरोनिल’ एक बार फिर विवादों में है। इसबार कोरोनिल को मिले कथित सर्टिफिकेट और बाबा के दावा को लेकर विवाद हुआ है। बाबा का दावा था कि ‘कोरोनिल’ के पास फार्मास्यूटिकल उत्पाद का प्रमाण पत्र है और इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन के गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) द्वारा मान्यता मिली है। पतंजलि ने दावा किया कि इससे साबित होता है कि ‘कोरोनिल’ कोरोना के ख़िलाफ़ कारगर है।

हालांकि पतंजलि के इस दावे को ख़ुद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नकार दिया है। संगठन के साउथ-ईस्ट एशिया विंग ने ट्वीट कर बताया, ‘डब्ल्यूएचओ ने कोरोना के इलाज के लिए किसी भी पारंपरिक दवाई की इफेक्टिवनेस यानि प्रभावशीलता की समीक्षा या सर्टिफिकेशन नहीं किया है।’ दरअसल 19 फरवरी को बाबा की कंपनी पतंजलि ने दावा किया था कि इसने कोरोना की दवाई की खोज कर ली है। पतंजलि की तरफ से किए गए ट्वीट में कहा गया, ‘गौरव का क्षण! कोरोना की दवा बनाने की पतंजलि के वैज्ञानिकों की कोशिशें आज कामयाब हो गईं।’

बाबा ने ख़ुद दावा किया कि दवाई को लेकर कंपनी के पास 25 रिसर्च पेपर हैं और अब इस पर ‘कोई सवाल नहीं उठा सकता।’ उन्होंने उसी शाम एक टीवी इंटरव्यू में कहा, ‘डब्ल्यूएचओ की एक पूरी टीम हमारे यहां विज़िट के लिए आई थी। डब्ल्यूएचओ ने कोरोनिल को 150 से ज़्यादा देशों में बेचने का लाइसेंस दिया है। इंटनैशनल टॉप 9 जरनल्स में इसके रिसर्च पेपर पब्लिश हुए हैं। उन्होंने एलोपैथिक मेडिसिन कंपनियों पर ‘मेडिकल टेररिज़्म’ का भी आरोप लगाया था।