31 सालों से अपने ही देश में शरणार्थी बने कश्मीरी पंडितों की घर वापसी कब ?

by GoNews Desk Jan 19, 2021 • 03:17 PM Views 203

कश्मीरी पंडियों के घर वापसी की लड़ाई लगातार जारी है। इस बीच मोदी सरकार ने राज्य के दो भाग ज़रूर कर दिए लेकिन कश्मीरियों की घर वापसी पर मौन रही। 31 सालों से अपने ही देश में दर बदर कश्मीरी पंडित अभी भी अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। बात साल 1989 की है जब घाटी में हिंसा चरम पर थी। 1989 में पहली बार जेकेएलएफ समर्थकों ने कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाना शुरू किया जब बीजेपी के खास नेता टीका लाल टपलू कि हत्या कर दी गई। तुरंत बाद ही श्रीनगर हाई कोर्ट के जज नीलकंठ गंजू की जेकेएलएफ के संस्थापक मकबूल भट को फांसी की सज़ा सुनाने के कारण हत्या कर दी गई।

वहीं साल 1989 में ही केन्द्रीय मंत्री रहे पीडीपी के मुफ्ती मुहम्मद सईद की बेटी को जेकेएलएफ समर्थकों ने अपहरण कर अपने पांच साथियों की रिहाई की मांग की। 1990 में ही एक कवि सर्वानंद कौल प्रेमी की हत्या और श्रीनगर दूर्रदर्शन स्टेशन के निदेशक लासा कौल जैसे बड़े लोगों की हत्याएं की गईं।

सैफुद्दीन सोज़ अपनी किताब 'कश्मीर, ग्लिंपस ऑफ हिस्ट्री एंड स्टोरी ऑफ स्ट्रगल' में लिखते हैं, कि जगमोहन को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त करने के पीछे कारण था कि कश्मीर के पंडित सुरक्षित महसूस कर सकें। उस दौरान प्रधानमंत्री वीपी सिंह की सरकार दिल्ली में बीजेपी के समर्थन से चल रही थी।साल 1990 में देश के तत्कालीन गृह मंत्री रहे मुफ्ति मुहम्मद सईद ने जगमोहन मल्होत्रा को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त किया।