ads

'जब किसान आंदोलन कर रहे, तब राष्ट्रपति कृषि कानूनों की प्रशंसा कर रहे, यह दुर्भाग्यपूर्ण': आनंद शर्मा

by Ajay Jha Feb 05, 2021 • 05:29 PM Views 713

राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की है और कहा  कि जब तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में देश में बड़े पैमाने पर किसान आंदोलन कर रहे हों, और ठीक उसी वक्त देश के राष्ट्रपति उन्हीं कानूनों की संसद में तारीफ कर रहे हों तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि किसानों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए मजबूर किया गया और जो स्थिति पैदा हुई है उसके लिए केंद्र जिम्मेदार है।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान गणतंत्र दिवस के दिन लाल किले की घटना से पूरा देश आहत है। उन्होंने कहा कि इस घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। शर्मा ने कहा कि देश में विषम परिस्थितियां हैं। केंद्र सरकार ने किसानों को घर से बाहर निकलकर प्रदर्शन करने को मजबूर किया है। उन्होंने किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान गणतंत्र दिवस की हिंसा के दौरान घायल हुए पुलिस कर्मियों और अधिकारियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की।

उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति का अभिभाषण सरकार का निराशाजनक प्रशंसा पत्र है। इस अभिभाषण में तीन कृषि कानून का अनावश्यक उल्लेख किया गया है जो दुर्भाग्यपूर्ण है।” उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति वही पढ़ते हैं जो सरकार लिख कर देती है। शर्मा ने कहा, "एक तरफ किसान आंदोलन चल रहा है, दूसरी तरफ संसद में उसी कानून की तारीफ हो रही है। इससे ज्यादा दुख की बात नहीं हो सकती।”

कांग्रेस सांसद ने कहा, "यह जरूरी नहीं है कि जो सरकार बोले उसे जनता मान ही ले या विपक्ष उसके साथ खड़ा हो तो फिर लोकतंत्र नहीं है. सरकार का दायित्व है जनता की आवाज को सुनना लेकिन विरोध प्रदर्शन को आप अपराध करार दे रहे हैं लेकिन जब किसान पर अत्याचार होगा या होता है तो उसके साथ देश खड़ा होगा सरकार को यह भूलना नहीं चाहिए."