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2020 में 6 सालों में महिलाओं के ख़िलाफ़ हुए सबसे ज़्यादा अपराध, यूपी रहा अव्वल

by GoNews Desk Feb 21, 2021 • 01:19 AM Views 480

‘अगर वो वहाँ रात में नहीं जाती तो शायद ऐसा नहीं होता’, ‘शायद उस लड़की ने छोटे कपड़े पहने थे’, ‘शायद लड़की ने ही बुलाया होगा’- जघन्य बलात्कार की घटना के बाद अगर आप पीड़िता को ही दोषी ठहराने वाले ऐसे बयान सुनकर किसी भी संवेदनशील इंसान को ग़ुस्सा आ सकता है। और अगर ऐसा बयान राष्ट्रीय महिला आयोग का कोई सदस्य दे तब तो लगेगा कि पूरी व्यवस्था ही महिलाओं का शिकार करने में जुटी है।

अफ़सोस कि नारी की पूजा करने का दावा करने वाले भारत का यही हाल हो रहा है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के बदायूँ में एक पचास वर्षीय महिला के साथ एक मंदिर में सामूहिक बलात्कार हुआ। इस  अपराध का आरोप मंदिर के पुजारी और उसके दो साथियों पर है। पूरे देश में आक्रोश की लहर उठी  पर राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य चंद्रमुखी देवी ने पीड़ित के परिजनों से मिलने के बाद जो बयान दिया उसने इस ग़ुस्से को और बढ़ा दिया  चंद्रमुखी देवी ने कहा कि पीड़ित महिला अगर शाम के वक्त मंदिर नहीं गई होतीं या उसके साथ परिवार का कोई बच्चा साथ में होता तो शायद ऐसी घटना नहीं घटती।

यानी जो आयोग महिलाओं के अधिकार और आज़ादी के पहरेदार की तरह वजूद में आया था, उसमें ऐसे सदस्य पहुँच गये हैं जो महिला को ही अपने ऊपर होने वाले अत्याचार की वजह मान रहे हैं। यह वही मानसिकता है जिसने भारत को महिला उत्पीड़न के मामले में शर्मिंदा करने वाले स्थान पर पहुँचा दिया है। साल 2020 में महिलाओं को पहले से ज़्यादा हिंसा का सामना करना पड़ा। हमारा देश किसी और क्षेत्र में आगे बढ़े या नहीं पर महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध करने की श्रेणी में निरंतर ऊपर चढ़ता जा रहा है।