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12 दिसंबर 1911 को सजे किंग जॉर्ज पंचम के दरबार की कहानी, जब दिल्ली बनी राजधानी

by Pankaj Srivastava Dec 12, 2020 • 06:21 PM Views 1046

दिल्ली के बुराड़ी में कोरोनेशन पार्क की चर्चा शायद ही कभी होती हो, लेकिन यहाँ खड़ी तमाम अंग्रेज़ों की प्रतिमाएँ 12 दिसंबर 1911 के उस जश्न की याद दिलाती हैं जब दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया था। कलकत्ता से दिल्ली राजधानी लाये जाने का ऐलान करने के लिए ख़ुद इंग्लैंड के किंग जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी मौजूद थीं। यूँ तो 1877 और 1903 में भी दिल्ली में दरबार हुआ था, लेकिन ये इग्लैंड के सम्राट किंग जार्ज पंचम और महारानी मैरी के राज्याभिषेक का उत्सव भी था जिसे दिल्ली को राजधानी बनाने के ऐलान ने बेहद ख़ास बना दिया था।

ब्रिटिश सम्राट के इस भव्य दरबार में हिंदुस्तानी रियासतदारों के लालच के घोड़ों और ख्वाहिशों के ऊँटों ने कोर्निश करने की होड़ में सारी हदें तोड़ दी थीं। 1857 में चमकी उनके पुरखों की तलवारें हमेशा के लिए लिए म्यान में चली गयी थीं। सम्राट ने हिंदुस्तानी शासकों को राज्यभक्ति का इनाम दिया। उन्हें मेडल और उपाधियां बाँटीं।

राज्याभिषेक समारोह के पहले सम्राट का काफिला पूरी शान से दिल्ली की सड़कों पर घूमा। बाद में सम्राट ने लालकिले के झरोखे पर पहुंचकर लोगों को दर्शन दिया। 1857 के बाद बेनूर हो चुकी दिल्ली की किस्मत ने, जिसे रिसायत-ए-पंजाब का महज जिला बनाकर छोड़ दिया गया था, अचानक पलटा खाया था। 54 साल बाद राजधानी होने का गौरव फिर उसके माथे पर सज गया था।