अर्थव्यवस्था का चक्का जाम, सरकार के आगे ख़र्च चलाने का संकट

by Rahul Gautam Jun 02, 2020 • 06:25 PM Views 3450

अर्थव्यवस्था का ताज़ा हाल विकास दर की सुस्त रफ़्तार से सामने आ चुका है. इस बीच सरकार की आमदनी घट रही है और अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडी ने निवेश के लिए भारत को नेगेटिव कैटगरी में डाल दिया है. अब सरकार की सबसे बड़ी चुनौती ये है कि निवेश और टैक्स वसूली के मोर्चे पर पिछड़ने के बाद वो अपने ख़र्च और योजनाओं के लिए पैसा कहां से लाएगी?

संकट में फंसी अर्थव्यवस्था के बीच सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने ख़र्च और कल्याणकारी योजनाओं के लिए पैसा जुटाना है. तमाम आंकड़े बता रहे हैं कि अर्थव्यवस्था की रफ़्तार सुस्त पड़ने के साथ-साथ उसकी आमदनी भी घटती जा रही है.

साल 2016 में इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स तेज़ी से ऊपर जा रहा था लेकिन साल 2020 आते-आते इसमें नेगेटिव ग्रोथ दर्ज हुई है. पिछले साल अर्थव्यवस्था की पतली होती हालत पर केंद्र सरकार घिरी तो वित मंत्री निर्मला सीतारमण ने कॉरपोरेट टैक्स में रियायत देने का ऐलान किया था. मकसद निवेश को बढ़ावा देना लेकिन कॉरपोरेट टैक्स में छूट देने से एक तरफ तो सरकार की आमदनी गिरी, वहीं दूसरी तरफ निवेशक भी उत्साहित नहीं हुए और बाज़ार में पैसा नहीं लगाया. अब हाल यह है कि निवेश तो बढ़ा नहीं और कॉरपोरेट टैक्स का और नुकसान हो गया.