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नेताजी सुभाष की बेटी के लिए नेहरू चुपचाप भिजवाते रहे आर्थिक मदद!

by Pankaj Srivastava Jan 23, 2021 • 06:12 PM Views 548

सुभाष चंद्र बोस और जवाहरलाल नेहरू…स्वतंत्रता आंदोलन के दो नायक, दोनों कांग्रेस के समाजवादी नेता जो भारत के लिए पूरा जीवन कुर्बान करने को तैयार थे। सुभाष ने महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता कहा तो नेहरू को महात्मा गाँधी ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। फर्क़ था तो रास्ते का। जहाँ नेहरू महात्मा गाँधी के अहिंसा के रास्ते से डिगने को तैयार नहीं थे, वहीं सुभाष बोस सशस्त्र संघर्ष के ज़रिये भारत को आज़ाद कराने निकल पड़े। हालाँकि यह रिश्ता कितना मज़बूत था, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि नेता जी की आज़ाद हिंद फ़ौज की एक ब्रिगेड़ का नाम गाँधी पर था तो दूसरा नेहरू पर।

लेकिन हाल के दिनों में दोनों नायकों को राजनीतिक कारणों से एक दूसरे के ख़िलाफ़ खड़ा किया जा रहा है। विमान दुर्घटना में सुभाष बोस की मृत्यु पर संशय जताते हुए दशकों से एक अभियान जारी है जिसके निशाने पर नेहरू रहते हैं।

बहरहाल, नेहरू वो शख्स थे जिन्होंने आज़ाद हिंद फौज के क़ैदियो के ख़िलाफ़ लाल क़िले पर चले मुकदमे में उनकी पैरवी करने के लिए अरसे बाद वकील का चोगा पहना था। बतौर प्रधानमंत्री लाल क़िले के पहले भाषण में नेता जी के साहस और बलिदान को याद किया था। 1957 में नेहरू सरकार ने ही ‘नेताजी रिसर्च ब्यूरो” की स्थापना की थी जिसका जिम्मा नेता जी के भतीजे शिशिर बोस को सौंपा गया था।