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14 साल पहले ख़त्म हुई मंडी, खेती का क्षेत्रफल पंजाब से ज़्यादा, पर सबसे ग़रीब बिहार का किसान

by GoNews Desk Dec 05, 2020 • 06:36 PM Views 189

देश में नए लागू नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसान सड़कों पर है। आरोप है की सरकार अनाज मंडियों को ख़त्म कर खेती को कॉरपोरेट हाथों में सौंपना चाहती है।  बिहार में साल 2006 में कृषि मंडियाँ ख़त्म की गयी थीं। आखिर बिहार के किसान को ऐसे कानूनों से पिछले 14 सालों में फ़ायदा पहुँचा है या नहीं, इसके लिए आंकड़ों पर गौर करना होगा।

लोकसभा में दिये गये आँकड़े बताते हैं कि देश में सब से कम आमदनी अगर किसी की है तो वो है बिहारी किसान, जो साल में केवल 45 हज़ार 317 रुपए ही कमाता है।जबकि सबसे ज़्यादा कमाई पंजाब और हरियाणा के किसानों की है जो इस आंदोलन में सबसे आगे हैं।

शायद उन्हें डर है कि कहीं उनकी हालत भी बिहार के किसानों जैसी न हो जाये। पंजाब का एक किसान सालाना औसतन 2 लाख 30 हज़ार 905 रुपए कमाता है। बिहार के किसान पर अपनी आमदमी की तुलना में क़र्ज़ भी बहुत है। कृषि मंत्रालय के 2015-16 के आंकड़ों के मुताबिक हर बिहारी किसान पर 19 हज़ार 672 रुपए क़र्ज़ है।