झूम बराबर झूम - खुली शराब की दुकानें, उमड़ी भीड़

by Darain Shahidi May 05, 2020 • 08:08 PM Views 474760

झूम बराबर झूम  - 40 दिन बाद आज जब शराब की दुकानें खुली तो कई लोग ये कहते हुए पाए गए की आज इतना पीयेंगे की कुत्ते फेल हो जाएंगे। इस मुहावरे का मतलब मुझे नहीं मालूम लेकिन शायद छक के पीने को दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के आस पास के इलाके में यही कहते हैं।

बहरहाल जब शराब की दुकानें खुली तो ऐसा लगा की जैसे कुछ लोगों की ज़िंदगी में कोरोना के इस मौसम में बहार आ गई हो। कौन से मास्क और कौन सी सोशल डिस्टन्सिंग। भीड़ इतनी बढ़ गई कि कई जगह पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया और कई जगह ठेके बंद करने पड़े। लोग बोरी और बड़े-बड़े बैग लेकर ठेके पर हाज़िर थे। जिसको जो माल मिला भर लिया। स्टॉक कर लिया। 

ये लोग मज़दूर नहीं थे। जिनके बारे में कुछ लोगों ने उड़ा दिया कि राशन ख़रीदने के पैसे नहीं हैं और शराब ख़रीद रहे हैं। ये शर्मनाक है। जिनके पास राशन का पैसा नहीं है वो दिहाड़ी मज़दूर हैं जो घर जाना चाहते हैं। सूरत और पुणे में उनपर डंडे बरसाए जा रहे हैं। सूरत के मज़दूर घर जाना चाहते हैं लेकिन साधन नहीं मिल रहे। तो वो लोग जिनमें कुछ पत्रकार भी शामिल हैं उन्हें ज़मीनी हक़ीक़त नहीं मालूम। और फिर सरकार ने इन मज़दूरों के लिए शराब की दुकाने नहीं खोली हैं। 

सरकार ने दुकाने इसलिए खोली हैं की उसे मुनाफ़ा हो। शराब के कारोबार में भारी मुनाफ़ा होता है। आप हैरान हो जाएंगे ये जानकार की शराब की बिक्री से कितना पैसा सरकार कमाती है। हम आपको बताते हैं। 

साल 2020-21 में शराब की बिक्री से कुल टैक्स कलेक्शन का अनुमान 2 लाख करोड़ रुपए का था।

राज्यों ने 2019-20 में शराब की बिक्री से मिलने वाले टैक्स का बजट एक लाख 70 हज़ार करोड़ रूपए रखा था जो कि उनके कुल टैक्स का 7.6% था। 

पिछले साल के मुक़ाबले इसमें लगभग 11 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी का अनुमान लगाया गया था।

इससे पहले अलग अलग राज्यों ने सालाना कितनी कमाई की वो भी देखिए। तमिल नाडु की कमाई लगभग तीस हज़ार करोड़ थी। हरियाणा की लगभग 20 हज़ार करोड़, महाराष्ट्र, कारनाटक, उत्तर प्रदेश, ये राज्य ऐसे हैं जहां शराब की भारी खपत है और कमाई हज़ारों करोड़ सालाना है। 

लेकिन फिर आ गया कोरोना और लॉकडाउन की वजह से शराब की बिक्री पर रोक लगा दी गई, जिससे राजस्व घाटा बढ़ता जा रहा था। एक अनुमान के मुताबिक़ रोज़ाना 700 करोड़ रूपये का नुकसान हो रहा था।

पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स के बाद शराब की बिक्री से सबसे अधिक कमाई होती है। मौजूदा समय में शराब और पेट्रोलियम दोनों ही जीएसटी के दायरे से बाहर हैं, इसलिए इनकी बिक्री से आने वाला पैसा राज्य सरकारों के खाते में जाता है।

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शराब की डिमांड टॉप पर है। मुनाफ़ा चोखा है। और शौकीनों की कमी नहीं है। इसलिए शराब की दुकानों को देख कर ऐसा लगा ही नहीं देश में महामारी फैली हुई है। सरकार को ये सोचना चाहिए की जब चारों तरफ़ डर का माहौल है, लोग एक दूसरे से बच के चल रहे हैं, बच के मिल रहे हैं, वहां शराब ख़रीदने वालों ने कमाल की नज़दीकी दिखाई।

सरकार को इन्हें इनाम देना चाहिए की मंदी और चौपट होती अर्थव्यवस्था में इन लोगों ने सरकार का फ़ायदा करवाया है। शराब ख़रीदकर हस्ते खेलते घर गए। क्या ये कोरोना वारियर्स नहीं हैं ? क्या सरकार इनके लिए भी फूल बरसाएगी ? नहीं भी बरसाएगी तो भी इन्हें दुनिया से क्या फ़र्क़ पड़ता है। ये ख़ुद ही ये कहकर मस्त हैं कि झूम बराबर झूम।