तबरेज़ अंसारी की मौत हत्या नहीं: झारखंड पुलिस

by Shahnawaz Malik Sep 10, 2019 • 04:23 PM Views 756

मॉब लिचिंग के लिए बदनाम बीजेपी शासित राज्य झारखंड में सताए गए लोगों को इंसाफ़ मिलना बेहद कठिन हो गया है. झारखंड पुलिस पर बार-बार मुजरिमों को उनके अंजाम तक पहुंचाने की बजाय उन्हें बचाने का आरोप लग रहा है. तबरेज़ अंसारी की माब लिंचिंग के मामले में भी ऐसा ही हो रहा है. 

झारखंड पुलिस अपनी चार्जशीट में तबरेज़ की मौत को हत्या का मामला नहीं मान रही क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह कार्डिएक अरेस्ट बताई गई है. अगर पुलिस अदालत में इस दावे को साबित कर देती है तो तबरेज़ को पोल से बांधकर मारने वाले सज़ा से बच सकते हैं. तबरेज़ के घरवालों ने सरायकेला खरसावां पुलिस पर मुलज़िमों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि 22 साल के नौजवान को दिल का दौरा क्यों पड़ा, इसकी राय डॉक्टरों से ली जानी चाहिए.

22 साल के नौजवान तबरेज़ अंसारी को सरायकेला खरसावां के धतकीडीह गांव में भीड़ ने 18 जून को पोल से बांधकर पीटा था. इस दौरान भीड़ तबरेज़ से जय श्री राम और जय हनुमान के नारे लगवा रही थी जो पिटाई से बुरी तरह ज़ख़्मी हो चुका था. उसके सिर में गहरी चोटें थीं. इसका वीडियो भी वायरल हुआ.

मगर सरायकेला पुलिस ने हिंसा करने वाले मुलज़िमों को गिरफ़्तार नहीं किया. उलटा उनकी शिक़ायत पर चोरी के आरोप में तबरेज़ को गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया जहां इलाज नहीं होने पर उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई और चार दिन बाद स्थानीय अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया.

तबरेज़ अंसारी की मौत के कुछ महीने पहले ही उसकी शादी हुई थी. मौत पर हंगामा हुआ तो सरायकेला पुलिस ने उसकी बीवी शाइस्ता की तहरीर पर 11 लोगों पर हत्या की धारा में एफ़आईआर दर्ज की और तीन महीने बाद अपनी जांच पूरी करके अदालत में चार्जशीट दाख़िल कर दी. शाइस्ता ने कहा कि तबरेज़ की मौत के दो दिन बाद पता चला कि वह गर्भवती है लेकिन सदमे और तनाव ने उसके अजन्मे बच्चे को भी ख़त्म कर दिया. अब उसके लिए इंसाफ़ मिलना भी मुश्किल लग रहा है.