ads

गोन्यूज़ स्पेशल: ट्विटर की टोंटी, किसके हाथों में कंट्रोल ?

by Pankaj Pachauri Feb 13, 2021 • 09:14 AM Views 952

ट्विटर और सरकार के बीच तक़रार बढ़ती ही जा रहा है। इससे सोशल मीडिया और सरकार के बीच लंबी रस्साकशी शुरु होती दिख रही है। कथित खालिस्तानी ट्विटर हैंडल पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के निर्देश को ट्विटर ने मानने से इनकार कर दिया था। इसके बाद क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संसद में कहा कि किसी भी सोशल मीडिया साइट्स को भारत सरकार का क़ानून मानना पड़ेगा। क़ानून मंत्री ने बात नहीं मानने को लेकर ट्विटर पर कार्रवाई करने की बात भी कही थी।

अब सवाल है कि इस तक़रार में ट्विटर की टोंटी का कंट्रोल किसके हाथों में होगा ? गोन्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ पंकज पचौरी ने इसका विश्लेषण किया है और बताया है कि आख़िर ट्विटर और सरकार के बीच इस तक़रार के पीछे असली वजह क्या है…

ट्विटर और सरकार के बीच मामला अब सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट ने इसको लेकर एक नोटिस भी जारी किया है। कोर्ट ने ट्विटर और सरकार को फेक न्यूज़ को लेकर नियम बनाने और फेक न्यूज़ पर नियंत्रण लगाने के लिए कहा है। जब 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तब सोशल मीडिया के दिग्गजों के साथ उन्होंने बैठकें की थीं। इसके बाद साल 2015 में एक ट्विटर संवाद शुरु की गई और इसके माध्यम से वो देश के लोगों और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से संवाद किया था और सवालों के जवाब भी दिए थे।

इसी तरह ट्विटर को लगातार सरकार से सहयोग मिलता रहा। साल 2016 में ट्विटर का लोगो सरकारी प्रेस कांफ्रेंस के बैकग्राउंड पर छाप दिया गया, जिससे साफ है कि सरकार ने ट्विटर को देश में अपना पैठ जमाने में भरपूर सहयोग किया। इसके बदले में ट्विटर ने भी सरकार को भरपूर समर्थन दिया।

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्विटर पर टॉप 10 शख्सियतों में सात अकेले सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के ही नेता हैं। इतना ही नहीं चुनाव से ठीक पहले ट्विटर के मौजूदा सीईओ जैक डॉर्सी ने पीएम मोदी से मुलाक़ात की थी। इसके बाद सोशल मीडिया साइट्स पर यह आरोप भी लगे थे कि आम चुनाव में बीजेपी को सोशल मीडिया से पूरी मदद मिली।

स्टैस्टा की एक रिपोर्ट बताती है कि ट्विटर के सब्सक्राइबर बेस में भारी गिरावट आई है। आंकड़े बताते हैं कि साल 2019 में जहां ट्विटर का सब्सक्राइबर बेस करीब 3.5 करोड़ था वो गिरकर 1.75 करोड़ रह गया है। यानि इससे साफ है कि भारत में ट्विटर कंपनी नुकसान में चल रही है। इसके सब्सक्राइबर बेस में लगातार गिरावट हो रही है। इसके मुक़ाबले अमेरिका में ट्विटर के करीब सात करोड़ और जापान में पांच करोड़ से ज़्यादा सब्सक्राइबर हैं।

स्टैस्टा के ही आंकड़ों से यह साफ हो जाता है कि भारतीय मार्केट में ट्विटर की हालत अन्य सोशल मीडिया कंपनी के मुक़ाबले बुरी स्थिति में है। भारत की सोशल मीडिया मार्केट में 82.53 फीसदी हिस्सेदारी अकेले फेसबुक की है। जबकि यूट्यूप की 7.34 फीसदी और पिंट्रेस्ट की करीब पांच फीसदी हिस्सेदारी है। अगर ट्विटर की बात करें तो भारतीय सोशल मीडिया मार्केट में इसकी हिस्सेदारी महज़ 2.53 फीसदी ही है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि ट्विटर खुद भी भारत से अपना बोरिया-बिस्तर बांधने की तैयारी में है।

अब अगर भारत में ट्विटर के कमाई की बात करें तो यहां ट्विटर और भी ज़्यादा पिछड़ गया है। ट्विटर का जहां ग्लोबल बिज़नेस 1,885 करोड़ का है वहीं भारत में इसकी कमाई महज़ 5.8 करोड़ है। आंकड़ों से साफ है कि भारत में ट्विटर भारी नुकसान में है। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि आख़िर ट्विटर की टोंटी का कंट्रोल किसके हाथों में होगा। अब ट्विटर रहेगा या जाएगा, यह तो वक्त ही बताएगा।