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गोन्यूज़ स्पेशल: क़िस्सा कांग्रेस का

by GoNews Desk Mar 05, 2021 • 08:58 PM Views 882

फ़िल्म प्यार की जीत साल 1948 इस दिल के टुकड़े हज़ार हुए कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा एक गाना है लेकिन आज जो क़िस्सा आपको सुनाऊँगा वो बड़ा पुराना है. 1948 से भी पुराना. आज़ादी से भी पुराना. कांग्रेस मुक्त भारत का नारा नया है लेकिन कॉन्सेप्ट काफ़ी पुराना है. ध्यान से सुनिए.

क़िस्सा ये है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस…  70 बार टूट चुकी है. बीसीयों दिग्गज नेता पार्टी से बाहर गए अलग अलग पार्टियाँ बनाई. कई नेताओं का सिक्का चल गया जिनका नहीं चला वे पार्टी में वापस आ गए. चुनाव जीते मंत्री भी बने मुख्यमंत्री भी बने. मानो कांग्रेस बहती हुई धारा है. कितने आ रहे हैं कितने जा रहे हैं. लेकिन ऐसा क्या कारण है कांग्रेस ख़त्म नहीं होती. इसलिए कहा कि कांग्रेस मुक्त भारत का कॉन्सेप्ट बहुत पुराना है. G 23 के इस दौर में इस बार भी कुछ ऐसा ही हो रहा है. क्सवाल उठने लगे हैं कि क्या कांग्रेस टूट जाएगी. आज़ादी के बाद सिंडिकेट और इंडिकेट का क़िस्सा भी आपको सुनाऊँगा लेकिन पहले सुनिए G23 का नया शिगूफ़ा जो वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस का सबसे खराब दौर कहा जा सकता है.

या कांग्रेस को इससे बड़ा ख़तरा है. आइए इसे समझने की कोशिश करते हैं कांग्रेस के इतिहास की कहानी से. तो सुनिए कांग्रेस के टूटने और बनने….. बनने और सँवरने….   टूट कर बिखरने और फिर से खड़े होने की कहानी.

आजादी से पहले कांग्रेस दो बार टूट चुकी थी। 1923 में चित्तरंजन दास और राहुल गांधी के लकड़नाना  मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस से अलग होकर स्वराज पार्टी का गठन किया था। बाद में ये वापस INC में शामिल हो गए 1939 में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने सार्दुलसिंह और शील भद्र यागी के साथ मिलकर अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक का निर्माण किया। फ़ॉर्वर्ड ब्लाक आज भी अस्तित्व में है. वो बात अलग है की नेताजी के वंशज आज भाजपा या कांग्रेस से चुनाव लड़ते हैं.

आजादी के बाद पहली कांग्रेस को 1951 में टूट का सामना करना पड़ा, जब दिग्गज नेता जेबी कृपलानी ने अलग होकर किसान मजदूर प्रजा पार्टी बनाई और एनजी रंगा ने हैदराबाद स्टेट प्रजा पार्टी बनाई। बाद में जय प्रकाश नारायण की प्रजा सोशलिस्ट पार्टी में इसका विलय हो गया. कांग्रेस से अलग होकर सौराष्ट्र खेदुत संघ भी इसी साल बनी। ये किसान आंदोलन से निकली हुई पार्टी थी जिसका नेतृत्व नरसिंहभाई धांधिया कर रहे थे.