ads

गोन्यूज़ स्पेशल: न्यू इंडिया नो डिमॉक्रेसी

by GoNews Desk Mar 12, 2021 • 05:41 PM Views 801

क्या भारत में ‘इलेक्टोरल डेमोक्रेसी’ से ‘इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी’ आ गई है। ये इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी क्या चीज़ होती है? अगर आसान शब्दों में समझें तो लोकतांत्रिक तरीक़े से जनता के वोट से चुने जाने के बाद अगर कोई नेता या सरकार मनमानी करने लगे और जनता के अधिकारों को दबाने लगे तो उसे इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी कहा जाता है।

क्या भारत में भी ऐसा ही हो रहा है ?

स्वीडन में एक संस्था है VDEM. वैरायटीज़ ऑफ़ डेमोक्रेसी जिसका कहना है कि हाँ भारत में ऐसा ही हो रहा है। VDEM दुनिया भर के लोकतंत्र पर रिसर्च करती है और ताज़ा रिपोर्ट में दुनिया भर के उन देशों पर रिसर्च की रिपोर्ट दी गई है जहाँ जहाँ लोकतांत्रिक मूल्यों या डेमक्रैटिक वैल्यूज़ में गिरावट आयी है। ऐसे देशों की तादाद 19 से बढ़ कर 32 हो गई है।

इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी में होता क्या है? सबसे पहले तो होता ये है कि वो देखने में लोकतंत्र जैसा लगता है लेकिन पर्दे के पीछे वो सब काम शुरू हो जाते हैं जो लोकतांत्रिक नहीं होते। सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वालों को जेल होती है, सवाल करने वालों से सवाल पूछे जाते हैं। ज़्यादातर मीडिया सरकार के गुणगान में लग जाती है। सरकार पर सवाल उठाने पर देशद्रोह का आरोप लगने लगता है. देश में human rights violation के मामले बढ़ने लगते है।

अंदर अंदर एक भय का माहौल तैयार होने लगता है. क्अब सवाल ये है कि क्या भारत में ये सब हो रहा है? VDEM की रिपोर्ट में इन सब बातों पर विस्तार से बात की गई है. पिछले दस सालों के हालात पर चर्चा की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक़ पिछले दस सालों में इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी के शिकार देशों की तादाद काफ़ी तेज़ी से बढ़ी है और दुनिया की 34 फीसदी आबादी पर इसका ख़तरा है। देखिए गोन्यूज़ इंडिया की ये ख़ास रिपोर्ट्स।