क्या होता है 'टूलकिट' जिसके इस्तेमाल से पर्यावरण एक्टिविस्ट 'राजद्रोही' हो गये!

by M. Nuruddin Feb 18, 2021 • 01:40 AM Views 1137

आजकल 'टूलकिट' को लेकर देश में बवाल मचा हुआ है। ‘टूलकिट’ की वजह से दिल्ली पुलिस ने एक क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि को गिरफ्तार कर पांच दिनों की रिमांड पर लिया है। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने मुंबई की एक वकील निकिता जैकब और इसी टूलकिट मामले से जुड़े एक इंजीनियर के ख़िलाफ अरेस्ट वॉरंट भी जारी किया है। दिल्ली पुलिस का दावा है कि इस टूलकिट के पीछे 'पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन' की साज़िश है जो कि एक खालिस्तान समर्थक संगठन है।

दिशा रवि पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर इस टूलकिट को साझा किया। हालांकि कोर्ट के सामने दिशा ने कहा कि उन्होंने इस दस्तावेज़ को तैयार नहीं किया बल्कि उन्होंने इस टूलकिट की दो लाइनें एडिट की थी। कथित रूप से इसी टूलकिट को स्वीडिश जलवायु एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने भी ट्विटर पर साझा किया था। दिल्ली पुलिस का दावा है कि दिशा ही उस टूलकिट की एडिटर हैं और उस दस्तावेज़ को तैयार करने और सोशल मीडिया पर साझा करने वाली ‘प्रमुख आरोपी’ हैं।

सवाल ये है कि ये ‘टूलकिट’ है क्या। आमतौर पर मशीनों को ठीक करने से जुड़े औज़ारों को टूलकिट समझा जाता है, लेकिन यहाँ बात वर्चुअल दस्तावेज़ की हो रही है। यह किसी मुद्दे को समझाने के लिए बनाया गया एक गूगल डॉक्यूमेंट होता है। टूलकिट में आमतौर पर आंदोलन को बढ़ाने के लिए 'एक्शन प्लान’ होते हैं। मोटे तौर पर इसका इस्तेमाल सोशल मीडिया के संदर्भ में किया जाता है, जिसमें विरोध-प्रदर्शन या आंदोलन से जुड़ी जानकारी होती है। इसमें यह बताया जाता है कि आप क्या पोस्ट करें, कौन से हैशटैग का इस्तेमाल करें।