ads

दिल्ली और मुंबई में किराएदारों के साथ धर्म के आधार पर होता है भेदभाव: रिपोर्ट

by GoNews Desk Mar 27, 2021 • 01:46 PM Views 989

मुस्लिम और दलित समुदाय के लोगों को राजधानी दिल्ली और मुंबई में किराए का घर लेने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मकान के मालिक और हाउसिंग सोसायटी द्वारा इन समुदाय के लोगों के साथ उनके धर्म के आधार पर भेदभाव की कई घटनाएं सामने आई हैं। आलम ये है कि अलग-अलग धर्म, पहनावे और अलग-अलग भाषाओं के लोगों से मिलकर दिल्ली अब उतनी मिलनसार नहीं रह गई है। यही हाल आर्थिक राजधानी मुंबई का भी है।

लोगों में मुसलमानों और दलितों के ख़िलाफ़ भेदभाव की भावना किस क़दर घर कर गई है, इसे जानने के लिए मीडिया आउटलेट आर्टिकल 14 ने ‘हाउसिंग डिस्क्रिमेशन प्रोजेक्ट’ की शुरुआत की थी। इसी मीडिया आउटलेट की रिपोर्ट में यह बताया गया है कि दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में लोगों को घर किराए पर देने के दौरान उनके साथ धर्म के आधार पर भेदभाव किया जाता है।

इस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली, मुंबई के 14 ‘क्लस्टर नेबरहुड’ का अध्ययन किया गया। दोनों शहरों के कई ब्रोकर और घरों के मालिकों और हाउसिंग सोसाएटी में इंटरव्यू किया गया। इस दौरान दिल्ली और मुंबई में ब्रोकरों ने स्वीकार किया कि वे कुछ संभावित किराएदारों, ख़ासकर मुसलमानों को घर किराए पर देने से इनकार करते हैं। कई ब्रोकरों ने यहां तक कहा, ‘मुस्लिम किराएदार क़ानूनी ज़िम्मेदारी साबित हो सकते हैं इसलिए उन्हें मकान नहीं दिया जाता।’ पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर में ब्रोकरों की एक बड़ी मार्केट है जो छात्रों को किराए पर घर दिलाने का काम करते हैं।