अब भारत में रेप के मामलों में पहले से ज़्यादा फाँसी की सज़ा

by Siddharth Chaturvedi Feb 13, 2021 • 06:22 PM Views 538

साल 2020 में महिलाओं को पहले से ज़्यादा हिंसा का सामना करना पड़ा। हमारा देश किसी और क्षेत्र में आगे बढ़े या नहीं पर महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध करने की श्रेणी में निरंतर ऊपर चढ़ता जा रहा है। वहीं हाल के कुछ सालों में कोर्ट ने भी बच्चियों से दरिंदगी के मामले में संजीदगी दिखाई है। दरअसल भारत में कैदियों को लेकर प्रोजेक्ट 39A ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल देशभर में सेशन कोर्ट की तरफ से 76 कैदियों को मौत की सज़ा सुनाई गई। इनमें से 50 कैदी यानी करीब 65% को यौन अपराध केस में सज़ा सुनाई गई। जो पिछले पांच साल के मुकाबले सबसे ज़्यादा है। चौंकाने वाली बात यह है कि 82% केस में विक्टिम नाबालिग है।

2016 में 17.64% कैदियों को सेक्सुअल ऑफेंस के केस में मौत की सज़ा सुनाई गई थी, जबकि 2020 में यह आंकड़ा बढ़कर 64.93% पहुंच गया। यानी पिछले पांच साल में सेक्सुअल ऑफेंस के केस में करीब 47% डेथ पेनल्टी बढ़ी है। इसके पीछे महिलाओं की जागरूकता और पॉक्सो एक्ट में बदलाव को माना जा रहा है। 2018 में इस एक्ट में बदलाव किया गया था और 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ सेक्सुअल ऑफेंस के केस में मौत तक की सज़ा का प्रावधान किया गया।

क्यूँकि साल 2020 में सेक्सुअल ऑफेंस के केस में करीब 47% डेथ पेनल्टी बढ़ी है तो यहाँ यह भी जानना ज़रूरी हो जाता है कि किस केस में कितनों को मौत की सज़ा मिली है। सेक्सुअल ऑफेंस में 46 लोगों की मौत की सज़ा सुनाई गई तो वहीं, 4 लोगों को चाइल्ड रेप विदाउट मर्डर केस में मौत की सज़ा सुनाई गई। किडनैपिंग विद मर्डर में 2 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई और मर्डर के मामले में 24 लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई।