दो बच्चों की नीति पर कोई विचार नहीं: केन्द्र

by M. Nuruddin Jul 24, 2021 • 07:18 PM Views 1056

केन्द्र सरकार ने संसद में यह स्पष्ट किया है कि दो बच्चे पर क़ानून बनाने को लोकर सरकार में कोई विचार नहीं चल रही है। लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री भारती प्रवीन पवार ने यह जानकारी दी। 

साथ ही उन्होंने परिवार नियोजन को लेकर चलाए जा रहे कार्यक्रमों की भी जानकारी दी। स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने बताया कि देश में 2005-06 के मुकाबले 2015-16 में कुल प्रजनन दर में कमी आई है। 

मसलन 2005-06 में प्रजनन दर 2.7 थी, जो 2015-16 में घट कर 2.2 हो गई। मंत्रालय के मुताबिक़ 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में 28 ऐसे हैं जहां कुल प्रजनन दर 2.1 का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।

इन राज्यों में केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि इन राज्यों ने बिना कोई सख्त कदम उठाए परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ा कर यह लक्ष्य हासिल किया गया है।

स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने बताया कि 'वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स, 2019' शीर्षक वाली एक रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र में आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग ने साल 2027 तक भारत की आबादी के 146.9 करोड़ होने का अनुमान लगाया है। 

दरअसल, पिछले कुछ सालों से देश में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर नीति या कानून बनाने की मांग उठ रही है। हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने जनसंख्या नीति की घोषणा की है। इसके बाद इस चर्चा ने और जोर पकड़ लिया है, लेकिन एक बार फिर केन्द्र सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दो बच्चों की नीति को लाने का उसका इरादा नहीं है।

आने वाले दिनों में भारत की जनसंख्या में तेजी से कमी आने की भी संभावना जताई जा रही है। आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 में स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि भारत में अगले दो दशकों में जनसंख्या वृद्धि में तेजी से गिरावट देखने को मिलेगी। इस सर्वेक्षण में कहा गया कि कुल प्रजनन दर में तेज गिरावट की वजह से 0-19 आयु वर्ग की आबादी अपने चरम पर पहुंच चुकी है।

ग़ौरतलब है कि साल 1994 में जब भारत ने जनसंख्या और विकास की घोषणा पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हस्ताक्षर किया था, तो उसमें परिवार के आकार और दो प्रसव के बीच के समय के निर्धारण के बारे में निर्णय लेने का अधिकार पति-पत्नी को दिया था। ऐसे में अगर सरकार इस तरह की कोई नीति लाती है तो अपने उस वचन का उल्लंघन ही करेगी।