सेना में एडल्ट्री क़ानून बहाल करने को सुप्रीम कोर्ट पहुँचा केन्द्र

by M. Nuruddin Jan 14, 2021 • 04:11 PM Views 439

केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर सेना में एडल्ट्री या व्याभिचार क़ानून को बहाल करने की मांग की है। 2018 में तत्कालीन चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्र की अध्यक्षता में गठित  पांच सदस्यीय बेंच ने एडल्ट्री क़ानून को रद्द कर दिया था। जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपने फैसले में कहा था कि ऐसा कोई भी क़ानून जो 'व्यक्ति कि गरिमा' और 'महिलाओं के साथ समान व्यवहार' को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, वो संविधान के ख़िलाफ़ है।

अगस्त 2018 में आते इस फ़ैसले में अंग्रेज़ो  के समय से लागू आईपीसी की धारा 497 को ग़ैरक़ानूनी क़रार देते हुए कहा था, ‘शादी में पति अपनी पत्नी का मालिक नहीं होता है। महिला या पुरुष में से किसी भी एक की दूसरे पर क़ानूनी सम्प्रभुता सिरे से ग़लत है।’ जस्टिस मिश्रा समेत जस्टिस रोहिंगटन नरीमन, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने एकमत से अपना फैसला सुनाया था।

तब कोर्ट ने कहा था, ‘धारा 497, अनुच्छेद 14 और 15 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करता है क्योंकि यह लिंग के आधार पर भेदभाव करता है और इसके तहत सिर्फ पुरुषों को अपराधी माना जाता है। एडल्ट्री को अपराध मानना एक ‘पुराना विचार’ है जिसमें पुरुष को अपराधी और महिला को पीड़ित माना जाता है लेकिन मौजूदा समय में हालात बदल गए हैं।’