लगभग आधे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने नहीं लगाया टीका

by Siddharth Chaturvedi Jan 27, 2021 • 06:02 PM Views 804

भारत सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद कोरोना टीकाकरण अभियान रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। साइड इफेक्ट्स का डर और टीके के असर को लेकर बने संदेह की वजह से डॉक्टर और अन्य हेल्थ केयर वर्कर भी इससे दूरी बना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई नई बात नहीं है क्योंकि जब भी कोई नई वैक्सीन आती है, संदेह रहते ही हैं। चेचक से लेकर पोलियो तक, हर वैक्सीन को शुरुआत में संदेह की नज़र से ही देखा गया था।

भारत में कोरोना टीकाकरण 16 जनवरी को शुरू हुआ था। 26 जनवरी तक 20 लाख 29 हजार 424 लोगों को टीका लग चुका है। इस हिसाब से क़रीब 54.5% लोग ही वैक्सीन लगवाने के लिए सामने आये हैं जबकि फिलहाल टीके डाक्टरों और हेल्थ केयर से जुड़े लोगों के प्रायोरिटी ग्रुप को लगने हैं। इस लिहाज से इस ग्रुप के 100 में से 45.5 लोगों ने वैक्सीन नहीं लगवाई है।

इसके अलावा कोवीशील्ड वैक्सीन की शीशी के साथ भी दिक्कत है। इसे खुला नहीं छोड़ा जा सकता। शीशी खोलने के चार घंटे के भीतर उसका इस्तेमाल करना होता है। ऐसे में ज़्यादा लोग न आने से वैक्सीन की डोज भी बर्बाद हो रही है। कुछ राज्यों ने तो स्पॉट रजिस्ट्रेशन कर वैक्सीन लगाने का तरीका अपनाया है ताकि वैक्सीन की बर्बादी रुक सके। पर यह कोई हल नहीं हो सकता, खासकर, जब अगले चरण में और अधिक लोगों को वैक्सीन लगने वाली है। भारत सरकार ने सबसे पहले एक करोड़ हेल्थ केयर वर्कर्स और दो करोड़ फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीका लगवाने की योजना बनाया है।