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136 साल की काँग्रेस : एक बार फिर शून्य से शिखर पर जाने की चुनौती!

by GoNews Desk Dec 29, 2020 • 05:05 PM Views 642

भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी इतिहास के सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रही है। घटता जनाधार, करिश्माई नेतृत्व की कमी, भीतरी गुटबाज़ी, विचारधारा को लेकर असमंजस, एक राजनीतिक दल में जितनी समस्या हो सकती है, वह सभी इस वक़्त कांग्रेस में मौजूद है। 2014 में 44 लोकसभा सीटों वाली ऐतिहासिक हार का मुँह देखने वाली पार्टी को 5 साल इन्हीं सब समस्या के चलते 2019 में एक और लज्जित हार का सामना करना पड़ा।

एक  नज़र डालते है कांग्रेस अबतक के सफर पर।

1885 में ब्रिटिश ए.ओ. ह्यूम ने कांग्रेस की स्थापना स्वतंत्रता संग्राम की गति को रोकने के लिए की थी। 1857 की क्रांति से दहले अंग्रेजों ने एक सेफ्टी वाल्व की ज़रूरत महसूस की थी।इस क्रांति ने ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन ख़त्म करके भारत को सीधे इंग्लैंड की महारानी के शासन के अधीन कर दिया था। ऐसे में महारानी की प्रजा को प्रार्थनापत्र देकर समस्याओं को उठाने के लिए एक मंच की आवश्यकता थी। शुरुआत में कांग्रेस की यही भूमिका थी। लेकिन जल्दी् ही  महात्मा गांधी के नेतृत्व में जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस जैसे जननायकों ने इसे आज़ादी की लड़ाई का सबसे बड़ा मंच बना दिया।