उत्तराखंड में तबाही की बारिश: लैंडस्लाइड और बाढ़ में मरने वालों का आंकड़ा 47 हुआ; कई इलाकों से संपर्क टूटा

by Sarfaroshi Oct 20, 2021 • 06:01 PM Views 876

त्तराखंड में बारिश से जुड़े कारणों जैसे फ्लैश फ्लड से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ कर 47 हो गई है। राज्य में करीब एक दर्जन लोगों के ज़ख्मी होने की और लगभग इतने ही लोगों के लापता होने की भी खबर है। जानकारी के मुताबिक सबसे ज़्यादा 28 लोग नैनीताल जिले में मारे गए हैं। अलमोरा में 6, चंपावत में 2, बघेश्वर में 1 और उद्धम सिंह नगर में भी दो लोगों की मौत हुई है जबकि 17 और 18 अक्टूबर को भी लोगों ने बाढ़ में अपनी जान गंवाई है। कई घर बाढ़ के साथ ही बह गए। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने मारे गए सभी लोगों के लिए 4 लाख के मुआवजे का ऐलान किया है।

उत्तराखंड में कैसे हैं हालात

बाढ़ के अलावा उत्तराखंड में भूस्खलन ने भी काफी तबाही मचाई है। फिलहाल बाढ़ ग्रस्त इलाकों में राहत बचाव अभियान जारी है और NDRF की 16 टीमें कम से कम 300 लोगों को बचाने में कामयाब रही है हालांकि कोसी नदी जैसे जल निकायों में खतरे के निशान से उपर बह रहा पानी और तबाही मचा सकता है। फोरेस्ट रिजोर्ट जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के पूर्वी किनारे पर बहने वाली इस नदी से वन्यजीव और वहां फंसे पर्यटकों की जान खतरे में हैं। आधिकारिक डाटा के अनुसार पिछले एक दिन में कोसी में 227 मिमी से 530 मिमी तक की वर्षा हुई है।  

पहले से ही भूस्खलन के प्रति संवेदनशील है नैनीताल

जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड में कई जगहों पर हो रही तबाही की शुरूआत मंगलवार को नैनीताल जिले में बादल फटने से आई फ्लैश फ्लड से हुई है। नैनीताल समेत उत्तराखंड के कई जिले बाढ़ और लैंडस्लाइड के लिहाज़ से पहले ही संवेदनशील हैं और ऐसे में हमेशा यह चिंता का कारण रहते हैं। चंपावत जिले के चंपावत-मंच-तामली रोड पर कई जगहों को भू-स्खलन के लिहाज़ से सेंसिटिव माना गया था। 2017 में सरकार ने नैनीताल को ईको-सेंसिटिव जोन घोषित किए जाने की पैरवी की थी। उसने कहा था कि जिले के आसपास कोई भी कंस्ट्रक्शन रोक दिया जाना चाहिए। इस तरह अलमोरा में शहरीकरण के कारण ओक के पेड़ों की भारी कटाई हुई है। इससे क्षेत्र में बाढ़ के संभावना बढ़ गई है।