भारतीय तनाव में, दि लैंसेट की रिपोर्ट

by M. Nuruddin Jul 17, 2021 • 08:16 PM Views 260

ब्रिटिश जर्नल दि लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 2019 में भारत की 35 फीसदी आबादी माइग्रेन और तनाव की वजह से होने वाले सिर दर्द का शिकार थी। रिपोर्ट में देश में बढ़ते न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स के विश्लेषण से यह जानताकी मिली है।

आंकड़े देखें तो 2019 के दौरान देश में कुल 48.8 करोड़ लोग माइग्रेन और तनाव जैसे मानसिक विकारों का शिकार थे। अगर लिंग के आधार पर देखें तो पुरुषों के मुक़ाबले महिलाएं कहीं ज़्यादा इन समस्याओं का शिकार थीं। जहां करीब 23.5 करोड़ पुरुष माइग्रेन और तनाव का शिकार थे वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 25.3 करोड़ से ज्यादा रहा था।

आज जिस तेजी से शहरीकरण हो रहा है उसका असर हमारे स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। भागती-दौड़ती जिंदगी काफी हद तक इसके लिए जिम्मेवार है। साथ ही भारत की उम्रदराज होती आबादी भी इसका एक कारण है।  वहीं हाइजीन और स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति बरती गई लापरवाही भी कई हद तक इसके लिए जिम्मेवार है।

यही वजह है कि भारत में 1990 की तुलना में 2019 तक 29 वर्षों में इस तरह के नॉन कम्युनिकेबल न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर जैसे स्ट्रोक, माइग्रेन, तनाव, मिर्गी, अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसे रोगों का बोझ करीब दोगुना हो गया है। जो 1990 में 4 फीसदी से बढ़कर 2019 में 8.2 फीसदी तक पहुंच गया है। 

शोध के मुताबिक देश में न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के बढ़ते बोझ के लिए काफी हद तक स्ट्रोक जिम्मेवार है। जहां न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर में इसकी हिस्सेदारी करीब 37.9 फीसदी की है। इसके बाद माइग्रेन और तनाव 17.5 फीसदी, मिर्गी 11.3 फीसदी, इसकी वजह से यह बोझ और तेज़ी से बढ़ रहा है।

इनके बाद सेरेब्रल पाल्सी 5.7 फीसदी, एन्सेफलाइटिस 5.3 फीसदी, मेनिनजाइटिस 4.8 फीसदी, अल्जाइमर और डिमेंशिया 4.6 फीसदी और गंभीर चोटों की वजह से दिमाग पर पड़ने वाला असर करीब 4.1 फीसदी के लिए जिम्मेवार है।

ङीटीई के मुताबिक अगर देखा जाए तो स्ट्रोक या आघात एक ऐसा न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जो देश में सबसे ज्यादा लोगों की जान ले रहा है| 2019 में जहां इसके 12.9 लाख मामले सामने आए थे, वहीं 6.99 लाख लोगों की जान गई थी, जिनमें 3.63 लाख पुरुष और 3.36 लाख महिलाएं थी।

स्ट्रोक के बाद सबसे ज्यादा मौतें अल्जाइमर और डिमेंशिया के कारण हुई थी जिसके कारण 2019 में 129,000 लोगों की जान गई थी, जिनमें 73,200 महिलाएं थी। वहीं पार्किंसन रोग से करीब 45,300, मिर्गी ने 32,700 और ब्रेन और सीएनएस कैंसर के कारण 23,700 लोगों की जान गई थी।

अगर कम्युनिकेबल न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर की बात करें तो देश में इंसेफेलाइटिस की वजह से करीब 51,900 लोगों की जान गई थी। वहीं मैनिन्जाइटिस की वजह से 34,700 और टेटनस के कारण 7,330 जानें गई थी।

वहीं यदि न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर से होने वाली कुल मौतों को देखें तो इनका सबसे बड़ा कारण स्ट्रोक है जिसकी इसमें हिस्सेदारी करीब 68 फीसदी थी।  इसके बाद अल्जाइमर और डिमेंशिया के कारण 12 फीसदी और इंसेफेलाइटिस 5 फीसदी मौतों का कारण था। 

स्पष्ट है कि न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर से होने वाली देश में कुल मौतों को देखें तो उनका सबसे बड़ा कारण स्ट्रोक था, जो न्यूरोलॉजिकल डिसॉर्डर से होने वाली करीब 68 फीसदी मौतों की वजह था।  इसके बाद अल्जाइमर और डिमेंशिया के कारण 12 फीसदी और इंसेफेलाइटिस 5 फीसदी मौतों का कारण था।