नोटबंदी के चार साल: भारतीय के अमीर होने की रफ़्तार पर ब्रेक

by GoNews Desk Nov 08, 2020 • 10:33 AM Views 701

पीएम नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में हुई नोटबंदी को आज चार साल पूरे हो गए। नोटबंदी के दौरान पूरा देश लाइन में खड़ा हुआ, नकदी का टोटा पड़ गया और यहाँ तक की कई लोगों की जान भी चली गई। 

तब नोटबंदी के पीछे सरकार ने तर्क दिया की इस ऐतिहासिक कदम से काला धन समाप्त हो जायेगा, नोटों की वजह डिजिटल पेमेंट का चलन शुरू हो जायेगा जिससे भ्रष्टाचार रुकेगा, नकली नोटों पर रोक लगेगी और आतंकवाद-नक्सलवाद देश से ख़त्म हो जाएगा। आइए समझते हैं गोन्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ पंकज पचौरी से, आंकड़ों के ज़रिये आखिर चार सालों बाद सच में हालात में कितना बदलाव हुआ।

नोटबंदी का सबसे पहला शिकार थी अर्थव्यवस्था। साल 2016-17 में जहां प्रति व्यक्ति आय में हर साल 6.7 फीसदी की दर से बढ़ रही थी , वो बढ़ोतरी साल 2019-20 आते-आते घटकर रह गई 3.9 फीसदी। आसान भाषा में नोटबंदी ने भारतीय के अमीर होने की रफ़्तार पर ब्रेक लगा दिया।

अर्थव्यवस्था गई तो उद्योग क्षेत्र और बैंकिंग सेक्टर भी साथ में नीचे गया। मसलन, इंडस्ट्री क्रेडिट इंडेक्स पिछले साल से लगभग 106 पर बना हुआ है। यानि उद्योगपति क़र्ज़ लेने से बच रहे हैं। दूसरी तरफ आम लोन इंडेक्स जैसे ऑटो लोन, हाउस लोन, पर्सनल लोन पिछले 4 सालों में 183 के आंकड़े पर पहुंच गया है। यानि आम आदमी के पास पैसा नहीं है और वो क़र्ज़ पर निर्भर है।

इसी तरह सरकार के तर्क के विपरीत पहले से लोग ज्यादा नगदी का इस्तेमाल कर रहे हैं। मसलन 2018 में जहां 18 लाख करोड़ से ज्यादा की नोट/सिक्के चलन में थे, वे 2020 में बढ़कर 24 लाख करोड़ से ज्यादा हो गए। यानि कैशलेस इकोनॉमी का नारा भी फुस साबित हुआ।