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Year Ender 2020: अर्थव्यवस्था के लिए बुरे सपने की तरह रहा 2020

by Rahul Gautam Dec 29, 2020 • 12:13 PM Views 391

अगर साल 2019 अर्थव्यवस्था के लिए एक बुरा सपना था तो साल 2020 ने अर्थव्यवस्था को मरणासन्न स्थिति में पहुँचा दिया। पहले से चरमराई इकॉनमी को कोरोना और लॉकडाउन ने ध्वस्त कर रख दिया जिसका नतीजा यह हुआ की पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा भारत की अर्थव्यवस्था को ही नुकसान पंहुचा। साल की शुरुआत में ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने वैश्विक मंदी के लिए संकट में फंसी भारत की अर्थव्यवस्था को ज़िम्मेदार ठहराया। जनवरी महीने में गीता गोपीनाथ के इस दावे ने केंद्र सरकार की हवा निकाल दी थी जो पटरी से उतर गई अर्थव्यवस्था के लिए वैश्विक मंदी को ज़िम्मेदार ठहराती थी।

इसके बाद फरवरी में देश में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ने लगा जिससे अर्थव्यवस्था को झटके लगने शुरू हुए। पहले से ही मंदी की मार झेल रही अर्थव्यवस्था पर अब कोरोना वायरस का ख़ौफ बट्टा लगाने लगा। विदेशी निवेशक भारत का साथ छोड़ने लगे और भारत की कैपिटल मार्केट से फरवरी 24 से मार्च 11 के बीच 4.96 बिलियन डॉलर यानि 36 हज़ार 221 करोड़ रुपए निकल गये। वायरस को रोकने के लिए इसके बाद मोदी सरकार ने 24 मार्च को राष्ट्रीय लॉकडाउन की घोषणा कर दी लेकिन अनजाने में ही इससे अर्थव्यवस्था को बहुत चोट पहुंची। लॉकडाउन के बाद देश में उद्योग-धंधों की कमर टूट गई है और भविष्य को लेकर संकट गहरा गया।

गिरती अर्थव्यवस्था में जान फूकने के लिए सरकार ने मई में 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज की घोषणा की। लेकिन इस पैकेज की पोल अंतर्राष्ट्रीय बैंको ने खोलकर रख दी। ज्यादातर अंतर्राष्ट्रीय बैंकों जैसे एचएसबीसी, यूबीएस का कहना था कि मोदी सरकार का 20 लाख करोड़ का पैकेज असल में देश की जीडीपी का केवल एक फीसदी है। वहीं पीएम मोदी ने अपने संबोधन में इसे जीडीपी का 10 फ़ीसदी हिस्सा बताया था।