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ऐप्स यूज़ करने में 60% लोगों को कैमरे से दिखने का डर, 25% यूज़र वेबकैम को देते हैं एक्सिस: स्टडी

by GoNews Desk 1 week ago Views 2198

Report: 1 in 4 online users allow apps access to m
कोरोना महामारी ने पूरे विश्व में बहुत कुछ बदल दिया है। और इस लंबी लिस्ट में एक चीज़ है जो क़रीब क़रीब सबसे ऊपर आती है वो है बच्चों की घर से चलने वाली पढ़ाई और बड़ों का घर से चलने वाला काम। इन दोनो बातों में अगर कुछ है जो एक है वो लैप्टॉप या मोबाइल फोन और ढेर सारा स्क्रीन टाइम। कोरोना ने मनुष्यों की दुनिया में वेबकैम को एक अभिन्न अंग बना दिया है। यह कैमरा और इसके साथ इस्तेमाल होने वाले माइक के कई फ़ायदे हैं, यह घर बैठे हमें दुनिया से जोड़ देता है पर हमें यह बिलकुल भी नहीं भूलना चाहिए कि फ़ायदों के साथ साथ नुक्सान भी आते हैं।

हाल ही में सामने आई एक स्टडी में पता चला है कि ऐप्स का इस्तेमाल करने के लिए एक चौथाई यूज़र्स अपने फोन के माइक और वेबकैम को अनुमति देते हैं। साइबर सिक्योरिटी फर्म कैस्परस्काई ने 15,000 लोगों पर की गई ग्लोबल स्टडी से पता लगाया है कि 4 में से 1 यूज़र ऐसा करता है। हालांकि, वेबकैम सुरक्षा को लेकर यूज़र्स ज़्यादा अवेयर हैं।


स्टडी में 10 में से 6 लोग इस बात से चिंतित थे कि उनकी मर्ज़ी के बिना वेबकैम की मदद से उन्हें देखा जा सकता है। 60% लोगों ने बताया कि मलिशियस सॉफ्टवेयर से इस काम को करा जा सकता है।

स्टडी में पता चला है कि कोविड-19 महामारी के बाद ज़्यादातर लोगों ने वीडियो क्रॉन्फ्रेसिंग प्लेटफॉर्म्स को माइक और कैमरे का एक्सिस दिया है। क्योंकि इसकी मदद से लोग जहां काम कर रहे हैं, तो बच्चों की पढ़ाई भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हो रही है। ये टूल्स अचानक हमारी ज़िंदगी में आए और अभिन्न अंग बन गए। ध्यान देने वाली बात यह है कि ऐप्स को ज़्यादा तर 25 से 34 साल की आयु वाले 27% लोग वेबकैम और माइक का एक्सिस देते हैं।

55 साल या उससे अधिक उम्र वाले 38% यूज़र्स ऐप्स या सर्विसेस को किसी तरह के एक्सिस नहीं देते। यानी कैमरा, माइक, गैलरी, कॉल, कॉन्टैक्ट जैसे दूसरे ऐप्स को एक्सिस नहीं दिए जाते।

कैस्परस्काई के कंज्यूमर प्रोडक्ट मार्केटिंग के हेड मरीना टिटोवा ने कहा कि कई लोग वेब कैमरा के उपयोग और साइबर सुरक्षा प्रक्रियाओं से संबंधित सुरक्षा प्रोटोकॉल से परिचित नहीं हैं। हालांकि, अब हम जो देख रहे हैं वह ऑनलाइन सुरक्षा और संभावित ख़तरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का एक मज़बूत सकारात्मक रुझान है। यह उपभोक्ता के अधिक सक्रिय व्यवहार को दिखाता है।

इसके साथ ही एक और रोचक तथ्य सामने आया है, वो यह है कि दुनियाभर में सबसे ज़्यादा भारतीय डेटा प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी के लिए इनसे जुड़ी ऑर्गनाइजेशन के साथ काम करते हैं। कनाडा स्थित इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट कंपनी ओपनटेक्स्ट द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक, 84% भारतीय डेटा प्राइवेसी फर्म के साथ काम करते हैं। सर्वे के दौरान देश के 6,000 लोगों से उनकी राय ली गई।

दूसरी तरफ, ब्रिटेन में 49%, जर्मनी में 41%, स्पेन में 36% और फ्रांस में 17% लोग डेटा प्राइवेसी फर्म के साथ काम करते हैं। यानी इससे साफ़ है कि भारतीय अपनी डेटा प्राइवेसी पर ज़्यादा ध्यान देते हैं।

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