कर्नाटक : कर्मचारियों को उचित वेतन न देेने के लिए आईफोन बनाने वाली कंपनी ने वाइस प्रेसीडेंट को निकाला

by Siddharth Chaturvedi 10 months ago Views 23205

विस्ट्रॉन के वर्कर्स ने कथित तौर पर वेतन का भुगतान नहीं होने पर 12 दिसंबर को उसके प्लांट की संपत्ति, मशीनरी और आईफोन को नष्ट कर दिया था।

Karnataka's iPhone maker removes vice president fo
एपल की ताइवानी सप्लायर विस्ट्रॉन कॉरपोरेशन ने कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट को नौकरी से निकाल दिया है। यह कदम पिछले दिनों कर्नाटक के कोलार में कंपनी के एक प्लांट में तोड़फोड़ के बाद उठाया गया है। विस्ट्रॉन ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि कर्मचारियों ने ये कदम उनके पूरे पैसे न मिलने और काम की ख़राब स्थिति की वजह से उठाया था। कंपनी ने अपने बयान में सभी कर्मचारीयों से माफी भी मांगी है। वाइस प्रेसिडेंट की ज़िम्मेदारी भारत में आईफोन मैन्युफैक्चरिंग के बिजनेस को देखने की थी।

विस्ट्रॉन ने एक बयान में कहा, “हम भारत में हमारे व्यवसाय की देखरेख करने वाले वाइस प्रेसीडेंट को हटा रहे हैं।” कंपनी ने कहा, “हम स्वीकार करते हैं कि हमने अपने विस्तार प्रोजेक्ट में गलतियां की हैं। कुछ प्रक्रियाओं को हमने लेबर एजेंसियों को प्रबंधित करने के लिए रखा है। भुगतान को मज़बूत और उन्नत बनाने की आवश्यकता है। हम इसे ठीक करने के लिए तत्काल कार्रवाई कर रहे हैं, जिसमें अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शामिल है।”


दरअसल एपल की ताइवानी सप्लायर विस्ट्रॉन की कर्नाटक वाली फैक्ट्री अपने यहां स्टाफ की संख्या में हुई तेज बढ़ोतरी को ठीक से संभाल नहीं पाई। पिछले दिनों प्लांट में हुई हिंसा और तोड़फोड़ की घटना की शुरुआती सरकारी जांच में कई नियमों का उल्लंघन होने के बारे में पता चला है।

विस्ट्रॉन के वर्कर्स ने कथित तौर पर वेतन का भुगतान नहीं होने पर 12 दिसंबर को उसके प्लांट की संपत्ति, मशीनरी और आईफोन को नष्ट कर दिया था। इस घटना में ताइवानी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था और इसी के चलते प्लांट भी बंद करना पड़ गया था।

इस साल की शुरुआत में चालू हुए इस प्लांट में आईफोन के एक मॉडल की असेंबलिंग होती है। कर्नाटक के एक फैक्टरी डिपार्टमेंट के मुताबिक कंपनी ने इस प्लांट के लिए 5,000 स्टाफ की इजाज़त ली हुई थी जबकि काम 10,500 लोग करते थे।

13 दिसंबर को हुई जांच की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘फैक्टरी में 10,500 लोग काम करते हैं लेकिन यहां के एचआर डिपार्टमेंट को लेबर लॉ की ठोस जानकारी नहीं है।’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फैक्टरी को जिस तरह से चलाया जा रहा था वह नियम और कानूनों के हिसाब से नहीं था। गौरतलब है कि एपल भी फैक्टरी का ऑडिट करा रही है।

सरकारी जांच रिपोर्ट के मुताबिक, विस्ट्रॉन ने आठ घंटे की शिफ्ट को अक्टूबर में बढ़ाकर 12 घंटे कर दिया था। नए वेतन में ओवरटाइम को शामिल किया गया था जिसको लेकर कर्मचारियों को भ्रम था, लेकिन कंपनी उसको दूर नहीं कर पाई। इसके अलावा उसने लेबर डिपार्टमेंट को नए वर्क शिफ्ट के बारे में भी नहीं बताया था।

साथ ही विस्ट्रॉन ने अक्टूबर में नया अटेंडेंस सिस्टम लागू किया था लेकिन उसमें आई तकनीकी दिक्कत को उसने ठीक नहीं किया। उस दिक्कत के चलते वर्कर्स की अटेंडेंस सही से नहीं लग रही थी। जांच में जिन अनियमितताओं का पता चला है, उसमें कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स और हाउसकीपिंग स्टाफ को कम वेतन दिया जाना भी है। इसके अलावा सरकारी मंजूरी लिए बिना फीमेल स्टाफ से ओवरटाइम कराने का भी मामला सामने आया है।

वहीं अब यह सब होने के बाद कंपनी ने कहा है कि, ‘हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सभी श्रमिकों को तुरंत मुआवजा दिया जाए और हम इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। ये सब दोबारा न हो ये सुनिश्चित करने के लिए हमने कर्मचारियों की सुविधा के लिए एक कर्मचारी सहायता कार्यक्रम शुरू किया है। हम सुधारात्मक कार्रवाइयों पर लगन से काम कर रहे हैं।’

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