'इंटरनेट' पर पाबंदी लगाने में 'भारत' 2020 में रहा दुनिया में सबसे आगे!

by Siddharth Chaturvedi 9 months ago Views 50168

India was at the forefront of the world in 2020 to
10 जनवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला आया था। ये फैसला कश्मीर में इंटरनेट शटडाउन के खिलाफ दायर याचिकाओं पर था। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट के इस्तेमाल को संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत जन्मसिद्ध अधिकार माना था। साथ ही ये भी कहा था कि लंबे समय तक इंटरनेट पर रोक लगाना मौलिक अधिकारों का हनन है।

बहरहाल हक़ीक़त बिल्कुल उलट है। साल 2020 में भारत पूरी दुुनिया में अव्वल नंबर पर था जहाँ सबसे ज़्यादा घंटों के लिए इंटरनेट पर रोक लगी।


डिजिटल प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी पर काम करने वाली टॉप-10 VPN वेबसाइट ने सालाना रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में भारत में 8,927 घंटों तक इंटरनेट पर पाबंदी रही और इस पाबंदी के चलते देश को 20 हजार करोड़ रुपए से ज़्यादा का नुकसान भी उठाना पड़ा।

इस क्षेत्र में भारत लगातार आगे बढ़ रहा है, जहाँ इस मामले में भारत 2019 में तीसरे नंबर पर था, वहीं 2020 में भारत दुनिया में पहले नंबर पर आ गया है। वहीं साल 2019 में देश में 4 हजार 196 घंटे इंटरनेट बंद रहा था।

10 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद 25 जनवरी से कश्मीर में 2G इंटरनेट शुरू कर दिया गया। हालांकि, सोशल मीडिया पर बैन जारी रहा। 4 मार्च को सरकार ने इस बैन को भी हटा दिया। पर वहां अब भी 2G इंटरनेट ही चल रहा है।

रिपोर्ट बताती है कि 2020 में जम्मू-कश्मीर में 8 हजार 799 घंटों तक इंटरनेट प्रभावित रहा। इसमें से एक हजार 527 घंटों तक तो इंटरनेट पूरी तरह बैन रहा। जबकि, 7 हजार 272 घंटों तक इंटरनेट प्रभावित रहा। यानी, वहाँ इंटरनेट सिर्फ नाम के लिए ही चला। जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट पर रोक होने की वजह से 20 हजार 317 करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा है।

वहीं जम्मू-कश्मीर के अलावा 2020 में मणिपुर में 72 घंटों के लिए इंटरनेट बंद हुआ जिससे 35 करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा, वहीं यह संख्या मेघालय में 48 घंटे है जिसके चलते 16 करोड़ रुपए का नुक़सान हुआ। अरुणाचल में 8 घंटों के लिए इंटरनेट प्रभावित रहा जिससे 2.6 करोड़ रुपए का नुक़सान झेलना पड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा घंटों तक इंटरनेट बंद करने के मामले में भारत के बाद म्यांमार दूसरे और चाड तीसरे नंबर पर रहा। म्यांमार में 8 हजार 808 घंटे और चाड में 4 हजार 608 घंटों तक इंटरनेट बंद रहा। इससे म्यांमार को 1,400 करोड़ और चाड को 170 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ पर नुकसान के मामले में बेलारूस भारत के बाद दूसरे नंबर पर है। बेलारूस में 2020 में 218 घंटों तक इंटरनेट पर रोक रही। इससे उसे करीब ढाई हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इंटरनेट पर पाबंदी की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाले 5 देशों में भारत और बेलारूस के अलावा यमन, म्यांमार और अज़रबैज़ान शामिल हैं। इन पांचों देशों में 27 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा नुकसान हुआ।

साल 2020 में दुनिया के 21 देशों में 27 हजार 165 घंटे तक इंटरनेट पर रोक रही। इसमें से 21 हजार 613 घंटे इंटरनेट पर और 5 हजार 552 घंटे सोशल मीडिया पर पाबंदी रही। इससे इन देशों को 30 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। डराने वाली बात यह है कि इस आँकड़े में 2019 के मुक़ाबले 49% का उछाल आया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेट पर रोक के पीछे जो दो सबसे बड़ी वजहें थीं। पहली राजनीतिक और दूसरी तनाव के हालात। सबसे ज्यादा 11 हजार 970 घंटे तक इंटरनेट पर रोक तनाव के हालात की वजह से रही।

CRPC 1973 और इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885 के तहत सरकारी एजेंसियों को भारत के राज्यों या जिलों में इंटरनेट बंद करने का अधिकार है। इसके अलावा टेम्परेरी सस्पेंशन ऑफ टेलीकॉम सर्विसेज (पब्लिक इमरजेंसी या पब्लिक सेफ्टी) रूल्स 2017 के आधार पर भी सरकार टेलीकॉम कंपनियों को अपनी सेवाएं निलंबित करने को भी कह सकती है।

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