World Press Freedom Day : जानिए क्यों और कब से मनाया जा रहा विश्व प्रेस आजादी दिवस

by Siddharth Chaturvedi 5 months ago Views 1535

World Press Freedom Day: Know why and when World P
दुनियाभर में हर साल तीन मई को विश्व प्रेस आजादी दिवस मनाया जाता है। इस दिन ये बताया जाता है कि मीडिया का समाज में कितना अहम योगदान है। मीडिया की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। आज हम आपको बताएंगे कि ये पहली बार कब मनाया गया और साथ ही विश्व रैंकिंग में भारत का कौनसा स्थान है।

बता दें कि साल 1991 में अफ्रीका के पत्रकारों ने प्रेस की आजादी के लिए मुहिम छेड़ी थी। इन पत्रकारों ने तीन मई को प्रेस की आजादी के सिद्धांतों को लेकर बयान जारी किया था जिसे डिक्लेरेशन ऑफ विंडहोक के नाम से भी जानते हैं। इसके ठीक दो साल बाद यानी साल 1993 में संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने पहली बार विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने का फैसला किया था। उस दिन से लेकर आज तक हर साल तीन मई को विश्व प्रेस आजादी दिवस मनाया जाता है।


इसके पीछे कारण यह है कि दुनियाभर से आए दिन पत्रकारों पर हुए उत्पीड़न की खबरें आती रहती हैं। पत्रकारिता एक जोखिमभरा काम भी है। पत्रकारिता के दौरान पत्रकारों पर कई बार हमले भी कर दिए जाते हैं। फिर चाहे सऊदी अरब के जमाल खगोशी हों या फिर भारत की गौरी लंकेश। समय-समय पर पत्रकारों पर हमले या फिर उनकी हत्या की खबर सामने आ ही जाती है। ऐसे में पत्रकारों पर हो रहे उत्पीड़न और उनकी आवाज को अलग-अलग ताकतों द्वारा दबाया नहीं जाए इसीलिए भी विश्व प्रेस आजादी दिवस मनाया जाता है।

बता दें कि सन 1997 से हर साल तीन मई यानी विश्व प्रेस आजादी दिवस पर यूनेस्को गिलेरमो कानो वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम प्राइज देता है। ये उस संस्थान या फिर व्यक्ति को दिया जाता है, जिसने प्रेस की आजादी के लिए कुछ बड़ा काम किया होता है।

वैसे आपको बता दें कि पिछले महीने 20 अप्रैल को वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2021 की लिस्ट जारी की गई, जिसमें भारत इस साल भी 180 देशों की सूची में 142वें नंबर पर रहा। पिछले साल भी भारत इसी नंबर पर रहा था। इस लिस्ट में पहला नाम नॉर्वे का है, वहीं दूसरे स्थान फिनलैंड और तीसरे पायदान पर डेनमार्क काबिज है। 180 देशों की सूची में सबसे आखिरी नंबर पर इरीट्रिया का नाम आता है।

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