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मुरुगन के सहारे दक्षिण का दुर्ग जीतने निकली बीजेपी की ‘वेल यात्रा’ पर रोक

by M. Nuruddin 5 months ago Views 2567

With the help of Murugan, BJP's 'Vel Yatra' came o
तमिलनाडु सरकार ने आज से प्रस्तावित बीजेपी की ‘वेत्री वेल यात्रा’ को इजाज़त देने से इंकार कर दिया है। सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट को यह जानकारी दी जो इस मामले की सुनवाई कर रहा है। सरकार ने कहा है कि इस यात्रा से कोरोना के संक्रमण फैलने का ख़तरा है। बीजेपी भगवान मुरुगन को समर्पित यह यात्रा 6 नवंबर से 6 दिसंबर के बीच निकालना चाहती थी। राज्य की एआईएडीएमके सरकार को वैसे बीजेपी का सहयोगी माना जाता है।

विपक्ष का कहना है कि राज्य में हिंदुओं की धार्मिक भावनआों को भड़काकर बीजेपी राजनीतिक लाभ लेने के लिए यह यात्रा निकालना चाहती है। दक्षिण भारत में अपनी पैठ मज़बूत करने के लिए बीजेपी भगवान मुरुगन का सहारा ले रही है जैसे कि उत्तर में उसने राम के सहारे राजनीति में लंबी छलांग लगायी थी।


इस यात्रा पर रोक लगाने के लिए चेन्नई के एक सामाजिक कार्यकर्ता पी. सेंथिल कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दी थी। याचिका में कहा गया था कि इस यात्रा से राज्य में क़ानून व्यवस्था के बिगड़ने का ख़तरा है। साथ ही कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस यात्रा को इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए। याचिकाकर्ता के मुताबिक यात्रा एक महीने बाद 6 दिसंबर को ख़त्म होगी, जो बाबरी मस्जिद विध्वंस की वर्षगांठ भी है। ऐसे में राज्य मे सांप्रदायिक विद्वेष के पैदा होने का ख़तरा है। पुलिस को रैली की इजाज़त नहीं देनी चाहिए।

तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष एल. मुरुगन ने भी माना है कि पार्टी इसके सहारे राजनीतिक फायदा लेना चाहती है। एक अंग्रेज़ी अख़बार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि भाजपा एक सामाजिक संगठन नहीं बल्कि राजनीतिक संगठन है। ऐसे में राजनीतिक फायदा पार्टी के लिए ज़रूरी है। एल. मुरुगन का कहना है कि बीजेपी लोगों को वैचारिक आधार पर मज़बूत बना रही है।

हालांकि विरोधी दलों का मानना है कि बीजेपी राज्य में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की कोशिश कर रही है। बीजेपी ने पहले भी इसी तरह की रैलियाँ की हैं जिससे लगता है कि उसका एकमात्र इरादा 'नकली सांप्रदायिक' घटनाओं का निर्माण करना है।

माना जाता है कि पूरे देश के मोदी लहर में डूब जाने के बावजूद तमिलनाडु मोदी विरोध की मिसाल रहा है। पिछले कई मौकों पर राज्य के लोगों ने सोशल मीडिया पर  #GoBackModi हैशटैग ट्रेंड करवाये हैं। ऐसा पहली बार है जब भाजपा महीने भर की यात्रा निकालने जा रही थी। एल.के. आडवाणी ने 30 साल पहले एक रथ यात्रा आयोजित की थी लेकिन तमिलनाडु में बहुत उत्साह पैदा नहीं हुआ था।

ग़ौरतलब है कि राज्य में भाजपा का वोट शेयर लगातार गिर रहा है।  2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बीच पार्टी को 5.56 फीसदी वोट मिले थे लेकिन 2019 में गिरकर 3.66 फीसदी रह गया । आरोप है कि ऐसे में पार्टी अब अपने सांप्रदायिक विभाजन के ‘टेस्टेड’ रास्ते पर चलना चाहती है। यह अलग बात है कि तमिनाडु पेरियार रामास्वामी के ‘आत्मसम्मान आंदोलन’ और जस्टिस पार्टी के प्रयोग की भूमि है जहाँ आरएसएस के ‘आर्य श्रेष्ठता’ के सिद्धांत को ‘द्रविड़ गौरव’ के दम पर बार-बार परास्त किया जाता रहा है।

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