Ukraine क्यों जाते हैं भारतीय स्टूडेंट्स और अब कैसे लाए जाएंगे ?

by GoNews Desk 5 months ago Views 1999

भारतीय नागरिक जिसमें ज़्यादातर स्टूडेंट्स हैं, मेट्रो स्टेशन, बंकर में छुपने को मज़बूर हैं। कई ऐसे भी हैं जो पत्नी, बच्चों के साथ कई किलोमीटर की पैदल यात्रा कर दूसरे देश में शरण के लिए पहुंच रहे हैं...

Why do Indian students go to Ukraine and how will
रूसी सेना के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद हज़ारों की संख्या में भारतीय नागरिक यूक्रेन में फंस गए हैं। भारतीय नागरिक जिसमें ज़्यादातर स्टूडेंट्स हैं, मेट्रो स्टेशन, बंकर में छुपने को मज़बूर हैं। कई ऐसे भी हैं जो पत्नी, बच्चों के साथ कई किलोमीटर की पैदल यात्रा कर दूसरे देश में शरण के लिए पहुंच रहे हैं। भारतीय यूक्रेन के पड़ोसी देशों और यूक्रेन की राजधानी से दूर बसे शहरों में अपनी जान बचाने के लिए पहुंच रहे हैं। 

बताया जा रहा है कि 16 हज़ार की संख्या में भारतीय नागरिक यूक्रेन में फंसे हुए हैं। हालांकि 20 फरवरी को भारतीय दूतावास ने यूक्रेन में तब हालात ख़राब होता देख एक एडवाइज़री जारी किया था जिसमें भारतीय नागरिकों को तत्काल प्रभाव से यूक्रेन छोड़ने की सलाह दी गई थी। हालांकि छात्र बताते हैं कि तबतक सभी फ्लाइट बुक हो चुकी थी।


रूसी आक्रमण से पहले एयर इंडिया की कुछ फ्लाइट कुछ नागरिकों को लेकर स्वेदश आई है लेकिन इसका टिकट बहुत महंगा कर दिया गया है। आमतौर से 20 हज़ार रूपये के मिलने वाले टिकट के दाम 60-70 हज़ार रूपये से एक लाख रूपये तक पहुंच गया। हालांकि आक्रमण के बाद अब यूक्रेन ने एयरस्पेस बंद कर दिया है। ऐसे में अब एयर इंडिया का महंगा इवेक्वेशन भी बंद हो गया है।

भारत ने यूक्रेन में फंसे नागरिकों को निकालने के लिए हंगरी और पोलैंड से यूक्रेन की सीमाओं पर सरकारी दल भेजे हैं। हवाई स्पेस बंद होने की वजह से अधिकारी ज़मीन से यात्रा कर वहां पहुंच रहे हैं।

भारत ने सुरक्षित मार्गों की पहचान की है जिनका इस्तेमाल वे यूक्रेन से अपने नागरिकों को निकालने के लिए करने की योजना बना रहे हैं। भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा, "सुरक्षित मार्गों की पहचान कर ली गई है। सड़क मार्ग से, अगर आप कीव से जाते हैं, तो आप नौ घंटे में पोलैंड और लगभग 12 घंटे में रोमानिया पहुंच जाएंगे। सड़क का नक्शा तैयार कर लिया गया है।"

विदेश मंत्रालय (MEA) ने यूक्रेन में भारतीयों को सहायता और सूचना प्रदान करने के लिए एक समर्पित 24*7 नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। साथ ही बता दें कि भारतीय को अपने-अपने ठिकानों पर छिपे रहने की भी सलाह दी है।

भारतीय स्टूडेंट्स यूक्रेन क्यों जाते हैं?

'स्टडी इन यूक्रेन' वेबसाइट के मुताबिक़, बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स यूक्रेन जाते हैं क्योंकि वहां मेडिकल की पढ़ाई करना सस्ता पड़ता है। वेबसाइट के मुताबिक़ यूक्रेन में अर्जित डिग्री को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), यूरोपीय परिषद और अन्य वैश्विक निकायों सहित दुनिया भर में मान्यता प्राप्त है।

वेबसाइट के मुताबिक़ यूक्रेन में पढ़ाई पूरा होने के बाद यूरोप में स्थायी निवास और बसने की संभावना है।

ऐसे में बड़ी संख्या में भारतीय अपनी पढ़ाई पूरी करके यूरोप में बस जाना पसंद करते हैं क्योंकि भारत में आने के बाद उन्हें Foreign Medical Graduates Examination (FMGE) पास करना होता है, जो औसतन 15 फीसदी स्टूडेंट्स ही विदेश में पढ़ाई के बाद यह परीक्षा पास कर पाते हैं। मेडिकल के अलावा कुछ स्टूडेंट्स यूक्रेन इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने गए हैं।

यूक्रेन में कितने भारतीय स्टूडेंट्स हैं? 

यूक्रेन के शिक्षा और विज्ञान मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक़ यूक्रेन में 20,000 से ज़्यादा भारतीय नागरिक हैं और उनमें से 18,000 स्टूडेंट्स हैं। भारतीय, यूक्रेन में पढ़ने वाले लगभग 76,000 विदेशी स्टूडेंट्स में से सबसे बड़े समूह हैं।

युद्ध शुरू होने के बाद से, लगभग 4,000 भारतीय यूक्रेन छोड़ने में सक्षम हो गए हैं, लेकिन 16,000 अभी भी फंसे हुए हैं। राज्य सरकारों ने केंद्र से युद्धग्रस्स यूक्रेन से स्टूडेंट्स को सुरक्षित निकालने का आग्रह किया है।

लाखों भारतीय स्टूडेंट्स चले जाते हैं विदेश !

Gonewsindia ने पहले आपको बताया था कि शैक्षिक बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की कमी की वजह से 2021 में 11.33 लाख (11,33,749) से ज़्यादा छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश चले गए। 2020 में, यह संख्या 261,406 थी, हालांकि इसके बारे में यही माना जा रहा है कि यह आंकड़े कम हो सकते हैं।

साल 2020 में महामारी के दौरान बड़ी संख्या में विदेश पढ़ने जाने वाले छात्र वैश्विक लॉकडाउन की वजह से ऑनलाइन क्लास ले रहे थे लेकिन महामारी के लगभग ख़त्म होने और वैश्विक लॉकडाउन में ढिलाई के बाद से विदेश जाने वाले भारतीय की संख्या दोगुने की रफ्तार से बढ़ी, लेकिन 2019 में यह संख्या 588,931 थी और 2018 में 520,342 रही थी।

कंसल्टिंग फर्म रेड सीर की “Higher Education Abroad” शीर्षक वाली एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2024 तक विदेशों में 18 लाख से ज़्यादा भारतीय छात्र होंगे। इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि इन छात्रों द्वारा विदेशों में कुल खर्च 85 अरब डॉलर होगा, जो प्रति छात्र लगभग 89 लाख रुपये बनता है। इसके उलट भारत सरकार अपने छात्रों पर उच्च शिक्षा के लिए दस हज़ार रूपये से कुछ ज़्यादा ख़र्च करती है।

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