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दुनियाभर के मुसलमान क्यों कर रहे फ्रांस का विरोध ?

by M. Nuruddin 5 months ago Views 1367

Why are Muslims protesting worldwide against Franc
दुनिया के कई मुस्लिम देश फ्रांस के ख़िलाफ़ एकजुट हो रहे हैं। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस्लाम के ‘संकट’ में होने की बात कही थी। इसी महीने 21 अक्टूबर को इमैनुएल मैक्रों कथित पैग़ंबर मुहम्मद का कैरिकेचर दिखाने के आरोप में मारे गए शिक्षक सैमुअल पेटी की शोक सभा में शामिल हुए थे। उन्होंने इस सभा में कहा था कि ‘हम कार्टून बनाना नहीं छोड़ेंगे।’ उन्होंने दावा किया कि पेटी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करने के लिए मारे गए थे।

इइसके बाद दुनिया के कई मुस्लिम देशों में फ्रांसीसी राष्ट्रपति के ख़िलाफ गुस्सा फूट पड़ा और जमकर विरोध प्रदर्शन हुए। फ्रांसीसी राष्ट्रपति के ख़िलाफ पश्चिम से पूर्व तक यूके, कुवैत, कतर, फिलिस्तीन, मिस्र, अल्जीरिया, जॉर्डन, ईरान, सऊदी अरब और तुर्की समेत कई देशों में मुसलमान सड़क पर उतर आए और फ्रांसीसी सामानों का बहिष्कार करने लगे।


इनके अलावा कुछ दक्षिण  एशियाई देशों जैसे बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी फ्रांस के ख़िलाफ विरोध-प्रदर्शन हुए हैं। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में करीब 40 हज़ार लोगों ने बुधवार को फ्रांस के ख़िलाफ विरोध-प्रदर्शन किया।

इस बीच भारत ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति का बचाव किया है और उनके ख़िलाफ हो रहे विरोधों की निंदा की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘हम राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के ख़िलाफ़ अस्वीकार्य भाषा में व्यक्तिगत हमलों की निंदा करते हैं।

साथ ही भयानक तरीक़े से क्रूर आतंकवादी हमले में फ़्रांसीसी शिक्षक की हत्या किए जाने की भी निंदा करते हैं। हम उनके परिवार और फ्रांस के लोगों के साथ हमारी संवेदना व्यक्त करते हैं। किसी भी वजह से या किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद के समर्थन का कुछ औचित्य नहीं है।’

इस मसले पर हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मुस्लिम देशों को ख़त लिखा है, जिसमें उन्होंने ग़ैर-मुस्लिम बहुल देशों में ‘इस्लामोफोबिया और हमलों’ के ख़िलाफ एकजुट होने की अपील की है।

उन्होंने फ्रांसीसी राष्ट्रपति का नाम लिए बग़ैर कहा, ‘नेतृत्व के स्तर पर हालिया बयान इस बढ़ती इस्लामोफोबिया का एक आइना है जो यूरोपीय देशों में फैल रहा है और जहां बड़ी संख्या में मुसलमानों की आबादी है।’ इनके अलावा पाकिस्तान की संसद ने एक प्रस्ताव भी पास किया है जिसमें 57 मुस्लिम देशों के संगठन से फ्रांसीसी सामानों के बहिष्कार की अपील की है।

सामान्य रूप से पैग़ंबर मुहम्मद के कार्टून वाले मामले पर समूचे मुस्लिम देशों में नाराज़गी है लेकिन तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने फ़्रांस का खुलकर विरोध किया है। अर्दोआन ने फ़्रांस के सख़्त रुख़ का विरोध करते हुए लोगों से फ़्रांसीसी उत्पाद नहीं ख़रीदने की अपील की।

उन्होंने अपने एक संदेश में कहा कि फ़्रांस में मुसलमानों के ख़िलाफ़ ऐसा ही अभियान चलाया जा रहा है जैसा दूसरे विश्व युद्ध से पहले यहूदियों के ख़िलाफ़ चलाया गया था। इतना ही नहीं अर्दोआन ने मैक्रों को निशाने पर लेते हुए यहां तक कह दिया कि उनके (मैक्रों के) मानसिक स्वास्थ्य की जाँच होनी चाहिए।

अर्दोआन के इस बयान के बाद फ़्रांस के गृह मंत्री जेराल्ड डार्मानिन ने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि अन्य देशों को फ़्रांस के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेशी ताक़तें सोचती हैं कि फ़्रांस के मुसलमानों का उनसे जुड़ाव है। फ़्रांस के घरेलू मामलों में विदेशी ताक़तों को दख़ल देने का अधिकार किसने दिया ?

फ्रांसीसी गृह मंत्री का कहना है, ‘सच यह है कि सबकुछ ग़लत तरीक़े से पेश किया गया है जो बहुत अफ़सोसजनक और निंदनीय है। एक बात है जो इस देश के लोगों को समझना चाहिए वो यह है कि हम कट्टरपंथी इस्लामवाद के ख़िलाफ़ लड़ना चाहते हैं लेकिन हम यह मुसलमानों के साथ मिलकर कर रहे हैं उनके ख़िलाफ़ नहीं।

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