कहां से आया जीका वायरस ? केरल में पहला केस

by M. Nuruddin 11 months ago Views 2279

Where did the Zika virus come from? first case in
अभी कोरोना संक्रमण का प्रकोप कम भी नहीं हुआ था कि केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में जीका वायरस के 14 मामले सामने आ चुके हैं। संक्रमण की पुष्टि के बाद शुक्रवार को केरल के सभी जिलों में राज्यव्यापी अलर्ट जारी किया गया है। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने जीका संक्रमण की पुष्टि की है।

राज्य में गुरुवार को मच्छर जनित बीमारी का पहला मामला दर्ज किया गया था। यह संक्रमण सबसे पहले एक 24 वर्षीय गर्भवती महिला में पाया गया था। बाद में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने 19 और सैंपल की जांच की जिसमें 13 और मामलों की पुष्टि हुई। 


केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि तिरुवनंतपुरम से एनआईवी को भेजे गए 19 नमूनों में से डॉक्टरों सहित 13 स्वास्थ्य कर्मियों के जीका से संक्रमित होने का संदेह था, जिनके सैंपल की जांच की गई। 

दरअसल, मॉनसून की वजह से राज्य में लगातार बारिश हुई जिसकी वजह से मच्छर पनप गए हैं। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मच्छर जनित वायरस को बच्चों में सिकुड़े हुए दिमाग और गुइलेन-बैरे सिंड्रोम नामक एक दुर्लभ ऑटो-इम्यून बीमारी से जोड़ा गया है।

क्या है जीका वायरस ?

साल 1947 में पहली बार युगांडा में बंदरों में जीका वायरस की पहचान हुई थी। इसके बाद 1952 में मनुष्यों में इस वायरस की पुष्टि हुई। मच्छरों द्वारा प्रेषित, जीका एक वायरल संक्रमण है और इसके लक्षण बुखार, त्वचा पर चकत्ते और जोड़ों के दर्द सहित डेंगू के समान हैं। इसके अतिरिक्त, संक्रमित लोग जीका को यौन रूप से प्रसारित कर सकते हैं।

1960 के दशक से दुनिया भर में जीका के छिटपुट मामले सामने आए हैं, लेकिन बड़े स्तर पर पहला प्रकोप 2007 में प्रशांत के याप द्वीप में हुआ। 2015 में, ब्राजील में भी इस वायरस ने अपना कहर बरपाया, तब यह पता चला कि जीका को माइक्रोसेफली से जोड़ा जा सकता है, यह एक स्थिति है जिसमें बच्चे छोटे और अविकसित दिमाग के साथ पैदा होते हैं।

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के मुताबिक़, इस गंभीर बीमारी के लिए अस्पताल में भर्ती होना और इससे मृत्यु असामान्य है। हालांकि, रेयर मामलों में जीका की वजह से गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) हो सकता है।

जीका के याप आइसलैंड में प्रकोप के बाद अफ्रीका में सालों तक छिटपुट मामले दर्ज किए गए, बाद में इस वायरस ने फ्रेंच पोलिनेशिया में 2013-14 के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया और इसके बाद 2015-16 के दौरान दक्षिण अमेरिका में इस वायरस की पहचान हुई और बड़े स्तर पर संक्रमण की वजह से लोग प्रभावित हुए।

भारत में जीका की पहचान 

भारत में जीका वायरस के मामले पहली बार 1952-53 में दर्ज किये गए थे। इसके बाद साल 2016-17 के दौरान गुजरात में आउटब्रेक के तौर पर पहचान हुई। साल 2018 में राजस्थान और मध्य प्रदेश में बड़े आउटब्रेक हुए। लैंसेट के अध्ययन के मुताबिक़, 2018 के अंत में राजस्थान में जीका वायरस संक्रमण के 159 और मध्य प्रदेश में 127 मामले सामने आए।

इससे पहले, मई 2017 में गुजरात के अहमदाबाद जिले के बापूनगर इलाके में तीन मामलों का पता चला था। जुलाई 2017 में तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले से भी एक मामला सामने सामने आए थे।

सामान्यत: भारत में बढ़ते वैश्वीकरण, बढ़ती यात्राएं और वेक्टर एडीज मच्छर की मौजूदगी की वजह से भौगोलिक बाधाओं से परे इस बीमारी का प्रसार होता रहा है। ब्रिटिश जर्नल दि लैंसेट की मई 2019 की रिपोर्ट में बताया गया है कि जीका के संपर्क में आने वाले लोगों में जीका के माइल्ड और असिंप्टोमेटिक मामले देखे गए। रिपोर्ट में बताया गया था कि वायरस के आउटब्रेक की सीमा है, शायद कम करके आंका गया है। अगर पैटर्न साल 2019 में भी बरकार रहते तो इसके परिणाम बुरे हो सकते थे। 

रिपोर्ट के मुताबिक़ अगर तब वायरस का आउटब्रेक होता तो देश के करीब 465.7 मिलियन लोगों के इस वायरस की चपेट में आने की आशंका जताई गई थी। 

31 दिसंबर 2018 को यूएस सेंटर फॉर डिजीज लोगों के लिए लेवल-2 अलर्ट जारी किए थे और लोगों के भारत यात्रा पर जाने पर सावधानी बरतने की सलाह दी गई थी। इस वायरस का प्रकोप भी ठीक कोरोना के ही जैसा है- यह ह्युमन-टू-ह्युमन भी ट्रांसमिट होता है लेकिन इससे ख़तरा ज़्यादा नहीं है।

अब हाल ही में हुई संक्रमण की पुष्टियों पर फिलहाल कोई ख़ास रिपोर्ट सामने नहीं आई है लेकिन केन्द्र सरकार ने मॉनिटरिंग के लिए राज्य में एक टीम भेजी है, जो हालात की निगरानी करेगी।

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