राजा जब डरता है तो किलेबंदी करता है, महापंचायत में बोले टिकैत

by GoNews Desk 10 months ago Views 2656

'राजा जब डरता है तो किलेबंदी करता है। मोदी सरकार किसानों के डर से किलेबंदी करने में जुटी है।'

When the king is afraid, he makes fortifications,
किसानों का आंदोलन अब देशव्यापी बनता जा रहा है। आंदोलन अब हरियणा-पंजाब तक ही सीमित नहीं रह गया है। अलग-अलग राज्यों में किसान महापंचायतों में इकट्ठा हो रहा है। बुधवार को कई जगहों पर महापंचायत का आयोजन हुआ। हरियाणा के रोहतक, जिंद, उत्तराखंड के रूड़की और उत्तर प्रदेश के मथुरा में महापंचायत बुलाई गई। भारी संख्या में किसान महापंचायतों में जुट रहे हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान संगठन सक्रिय हो गए हैं। अबतक मुज़फ्फरनगर, बागपत, बिजनौर और मथुरा में महापंचायत हुई है, जहां बड़ी तादाद में किसान जुट रहे हैं। महापंचायतों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी जुट रही हैं। उधर जिंद के कडेला गांव में हुए महापंचायत में महिलाओं की भारी तादाद देखी गई।


उत्तर प्रदेश के मथुरा में हुए महापंचायत में राष्ट्रीय लोक दल समेत अन्य राजनीतिक दल भी हिस्सा ले रहे हैं। विपक्षी नेता महापंचायतों में तो हिस्सा ले रहे हैं लेकिन उन्हें मंच से दूर ही रखा जा रहा है। महापंचायतों में आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति और दिल्ली की सरहदों पर आंदोलन को और मज़बूत करने पर चर्चा हो रही है।

गणतंत्र दिवस के दिन लाल क़िले पर हुई घटना के बाद किसान आंदोलन ने एक अलग मोड़ लिया है। इस तरह की घटनाओं से किसान आंदोलन को ठेस पहुंचा है। इस घटना के बाद राजस्थान की किसान संगठन किसान महापंचायत और ऑल इंडिया किसान संघर्ष को-ऑर्डिनेशन कमेटी ने अपना आंदोलन वापस ले लिया। इस घटना के बाद यूपी पुलिस ने रात के अंधेरे में कई धरनास्थलों को खाली भी करा दिया।

इस घटना के बाद ग़ाज़ीपुर बॉर्डर से किसान नेता राकेश टिकैत की भावुक अपील ने मानो देशभर के किसानों की आंखे खोल दी है। इसके बाद उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और हरियाणा में गांव-गांव में किसान सक्रिय हो गए हैं और आंदोलन में अपना योगदान देने दिल्ली की सीमाओं पर पहुंच रहे हैं। नेश्नल हाइवे पर ट्रैक्टर, ट्रॉली का आना लगातार जारी है। 

बुधवार को उत्तराखंड के रुड़की में हुई किसान महापंचायत में भी भारी तादाद में किसान जुटे। किसान महापंचायत में नेताओं ने आंदोलन को ज़मीन पर और मज़बूत करने और जब तक तीनों क़ानून वापस न हों, आंदोलन को चलाए रखने का आह्वान किया। मथुरा में हुई किसान महापंचायत में राष्ट्रीय लोकदल के स्थानीय नेता भी शामिल हुए। इस पंचायत में 6 फरवरी को प्रस्तावित देशव्यापी चक्का जाम को कामयाब करने की अपील भी की गई। इतना ही नहीं महापंचायतों के अलावा गांव-गांव में किसान आंदोलन को मज़बूत करने के लिए छोटी पंचायतें भी हो रही है, जहां आंदोलन को मज़बूत करने पर चर्चा की जा रही है।

हरियाणा के जींद में आयोजित महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने सरकार को चेतावनी दी, ‘अभी तो किसानों ने सिर्फ कानून वापसी की बात कही है, अगर किसान गद्दी वापसी की बात पर आ गए तो उनका क्या होगा। इस बात को सरकार को भलिभांति सोच लेना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘सरकार ने प्रदर्शन स्थलों पर कीलें, गाड़ी, तार लगवा दिए हें, ये चीज़े किसानों को नहीं रोक पाएंगी।’ 

राकेश टिकैत ने कहा 'राजा जब डरता है तो किलेबंदी करता है। मोदी सरकार किसानों के डर से किलेबंदी करने में जुटी है।' उन्होंने कहा कि अभी सरकार को अक्टूबर तक का वक्त दिया गया है, आगे जैसे भी हालात रहेंगे, उसी मुताबिक आंदोलन की रूपरेखा तय होगी।

जिंद की महापंचायत में किसानों ने सरकार के सामने पांच प्रस्ताव रखे हैं। इनमें कृषि कानूनों की वापसी, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने, एमएसपी को कानूनी जामा पहनाने, किसानों का कर्ज़ा माफ करने और 26 जनवरी के दिन हिंसा के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों और इस दौरान पकड़े गए ट्रैक्टरों को छोड़ने की मांग की गई है।

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