कितने पोस्ट ग्रेजुएट्स हैं जेलों में बंद, जानिये इस खास रिपोर्ट में

by Rahul Gautam 4 months ago Views 1254
What is the relation of crime with education, see
देशभर की जेलों में सज़ा काट रहे क़ैदियों की शैक्षिक पृष्ठभूमि बताती है, कि ज़्यादातर क़ैदी, 12वीं क्लास तक की शिक्षा नहीं ले सके हैं. ऐसे क़ैदियों की संख्या, 1 लाख 27 हज़ार 362 है जबकि सज़ा काट रहे कुल क़ैदियों की संख्या, 1 लाख 39 हज़ार 488 है. यानी जेलों में सज़ा काट रहे 91 फ़ीसदी क़ैदी, उच्च शिक्षा से वंचित हैं. 

नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो ने देश की जेलों में बंद क़ैदियों की शैक्षिक पृष्ठभूमि का ब्यौरा जारी किया है. ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि देश की 1339 जेलों में कुल 1 लाख 39 हज़ार 488 दोषी सजा काट रहे हैं। इनमें 38 हज़ार 31 क़ैदी निरक्षर, 58 हज़ार 541 क़ैदी 10वीं से कम, और 30 हज़ार 790 क़ैदी 12वीं से कम पढ़े लिखे हैं। अगर इन तीनों वर्ग के क़ैदियों का आंकड़ा जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा 1 लाख 27 हज़ार 362 है जो कुल सज़ायाफ़्ता क़ैदियों का 91 फीसदी से ज़्यादा है।

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यह आंकड़ा बताता है कि हर 10 क़ैदियों में से 9 क़ैदी कभी स्कूल से आगे नहीं पढ़ पाए और किसी न किसी अपराध में पकड़े गए. हालांकि इन क़ैदियों की पढ़ाई बीच में क्यों छूट गई, इसमें तमाम सामाजिक और आर्थिक कारण हैं. वहीं उच्च शिक्षा हासिल करने वाले क़ैदियों की संख्या जेलों में ज़्यादा नहीं है. इनमें 8466 ग्रेजुएट, 1364 टेक्निकल डिग्री होल्डर और 2296 पोस्ट ग्रेजुएट स्नातक हैं। 

अगर विचाराधीन क़ैदियों का आंकड़ा देखें तो देशभर की जेलों में बंद 323537 विचाराधीन क़ैदियों में से 293277 बारहवीं से कम-पढ़े हैं। यानि जेलों में ऐसे विचाराधीन क़ैदियों की तादाद 90 फीसदी से ज्यादा है। इनके अलावा 21222 ग्रेजुएट, 3521 टेक्निकल डिग्री होल्डर और 5517 पोस्ट ग्रेजुएट हैं। एनसीआरबी के यह आंकड़े बताते हैं कि कैसे अपराध और शिक्षा का सीधा रिश्ता है।

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