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'कोवैक्सीन' से डर की वजह क्या है?

by M. Nuruddin 3 months ago Views 2703

फॉर्म हस्ताक्षर करने के बाद एम्स निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया, वैक्सीन कमेटी के चीफ और नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल और उनकी पत्नी समेत एक वैज्ञानिक ने भी टीका लगवाया है।

What is the reason for fear of 'covaxine'?
कोविड टीकाकरण का अभियान देश भर में शुरु हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए इसका उद्घाटन किया। पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट की कोवीशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का टीका पहले चरण में तीन करोड़ लोगों को लगाया जायेगा पर इसके साथ ही एक विवाद भी शुरू हो गया है। दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के रेज़िडेंट डॉक्टरों ने कोवैक्सीन को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

आरएमएल के रेज़िडेंट डॉक्टरों का आरोप है कि टीकाकरण के लिए सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड की जगह भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को ज़्यादा तरजीह दी जा रही है जो पहले से ही सवालों के घेरे में है। कोवैक्सीन ने आपात्कालीन मंज़ूरी प्राप्त करने से पहले ट्रायल प्रक्रिया पूरी नहीं की है।


आरएमएल के रेज़िडेंट डॉक्टरों की मांग है कि टीकाकरण के लिए कोवैक्सीन की जगह कोविशील्ड का इस्तेमाल किया जाये। अगर ऐसा नहीं हुआ तो बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मचारी टीका नहीं लगवायेंगे और टीकाकरण का लक्ष्य पूरा नहीं हो पायेगा। भारत बायोटेक की वैक्सीन को लेकर एक्सपर्ट पहले ही अपनी चिंता ज़ाहिर कर चुके हैं। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्सपर्ट के सवालों को अफवाह क़रार दिया है और कहा है कि दोनों वैक्सीन को पूरी जाँच के बाद ही मंज़ूरी दी गई है।

कोवैक्सीन के बारे में एक्सपर्ट की राय

कोवैक्सीन को भारत बायोटेक ने आईसीएमआर या इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च के साथ मिलकर बनाया है। जानकार बताते हैं कि वैक्सीन की पूरी तौर से ट्रायल प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में वैक्सीन को मंज़ूरी देना समझ से परे है। एक अंग्रेज़ी अख़बार को वेल्लोर स्थित सीएमसी मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर गगणदीप कांग ने बताया कि वैक्सीन कितनी कारगर है, इसके बारे में भारत बायोटेक ने कोई डेटा जारी नहीं किया है। ऐसे में सवाल है कि क्या आपात्कालीन मंज़ूरी वैक्सीन के ट्रायल के लिए दी गई है?

ड्रग्स कंट्रोलर जनरल से मंज़ूरी के बाद से ही भारत बायोटेक की वैक्सीन सवालों के घेरे में है।  इंडियन एकेडमी ऑफ साइंस के छह वैज्ञानिकों समेत 13 वैज्ञानिकों ने स्वास्थ्य मंत्रालय और भारत बायोटेक को चिट्ठी लिखकर इस बाबत चिंता जताई थी। वैज्ञानिकों ने भारत बायोटेक से वैक्सीन के ट्रायल और इसकी प्रभाव की क्षमता को लेकर डेटा जारी करने की अपील की थी। वैज्ञानिकों ने तभी चिंता जताई थी कि वैक्सीन की ट्रायल प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, ऐसे में वैक्सीन को लेकर लोगों में डर पैदा होना स्वभाविक है।

कोवैक्सीन पर भारत बायोटेक का दावा

हालांकि 7 जनवरी को भारत बायोटेक की ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर सुचित्रा एल्ला ने बयान जारी कर वैक्सीन के तीसरे फेज़ की ट्रायल प्रक्रिया पूरी करने का दावा किया था। उन्होंने दावा किया कि तीसरे फेज़ में 25,800 लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल हुआ है। हालांकि इस बात की जानकारी नहीं दी कि अपने तीनों फेज़ के ट्रायल में वैक्सीन कितनी कारगर साबित हुई।

भारत बायोटेक की मैनेजिंग डायरेक्टर ने अपने बयान में कहा है कि, ‘अगर किसी शख्स पर वैक्सीन के डोज़ के बाद कोई प्रतिकूल या गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो उसके स्वास्थ्य का पूरा ख़्याल रखा जायेगा। ऐसी स्थिति में अगर कोई गंभीर घटना होती है तो साबित होने के बाद इसका मुआवज़ा भारत बायोटेक देगा।’

बता दें कि आपको कौन सी वैक्सीन लगेगी, इसमें च्वाइस की कोई गुंजाइश नहीं है। वैसे जिन्हें कोवैक्सीन के डोज़ दिए जा रहे हैं उनसे एक फॉर्म पर हस्ताक्षर कराके सहमित ली जा रही है ताकि बाद में इसका प्रतिकूल प्रभाव होने पर चिन्हित किया जा सके। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ फॉर्म हस्ताक्षर करने के बाद एम्स निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया, वैक्सीन कमेटी के चीफ और नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल और उनकी पत्नी समेत एक वैज्ञानिक ने भी टीका लगवाया है।

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