संसद की नई इमारत में आख़िर क्या है ख़ास?

by M. Nuruddin 1 year ago Views 2271

सरकार का मानना है कि सरकारी कामकाज में सुधार लाने के लिए यह ज़रूरी है कि सभी मंत्रालय एक ही जगह पर हों।

What is special about the new parliament building?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद की नई इमारत का शिलान्यास और भूमिपूजन किया है। इस भवन को आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ पर साल 2022 तक पूरा करने की योजना है। संसद निर्माण के लिए 971 करोड़ रूपये का आवंटन हुआ है। हालांकि भवन के निर्माण कार्य पर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की रोक है। कोर्ट ने सख़्ती से मना किया है कि जबतक संवैधानिक मामलों का निपटारा नहीं होता तब तक निर्माण कार्य शुरु नहीं होगा।

लोकसभा अध्यक्ष के मुताबिक़ ये पूरा निर्माण 64,500 वर्ग मीटर में होगा। जो मौजूदा इमारत से 17000 वर्ग मीटर ज़्यादा है। नई इमारत में सांसदों के बैठने की व्यवस्था अंडर ग्राउंड होगी, जिसके तहत 888 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। वहीं राज्यसभा में 384 सदस्यों के बैठने की जगह होगी। ऐसा भविष्य में सांसदों की संख्या में बढ़ोतरी को ध्यान में रखकर किया गया है। संयुक्त बैठक के दौरान संसद के सभी 1,272 सदस्य एक साथ बैठ सकेंगे।


आख़िर नए संसद भवन की ज़रूरत क्यों ?

सरकार का मानना है कि संसद के बढ़ते काम की वजह से नई इमारत बनाने की ज़रूरत है। अभी का संसद भवन ब्रिटिशकाल में 1927 में बना था। इस भवन को बने 93 साल हो गए हैं। एक तो भवन में जगह कम है और तकनीक के इस दौर में इस भवन में अत्याधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था नहीं है।

कहा जा रहा है कि नये भवन में सभी सांसदों को अलग-अलग दफ़्तर दिया जाएगा, जिसमें आधुनिक डिजिटल सुविधाएं होंगी। नई इमारत में एक संविधान हॉल बनेगा जिसमें भारत की लोकतांत्रिक विरासत को दर्शाया जाएगा। साथ ही सांसदों के बैठने के लिए बड़ा हॉल, एक लाइब्रेरी, समितियों के लिए कई कमरे, भोजन कक्ष और बड़ी सी पार्किंग की जगह बनेगी।

सरकार ने यह साफ किया है कि नई संसद बनाते वक्त पुरानी इमारत की एक भी ईंट नहीं निकाली जाएगी। उन्होंने बताया कि इस इमारत में अब सुरक्षा संबंधी समस्याएं हैं। ये इमारत भूकंपरोधी भी नहीं है। इसमें आग लगने पर बचने का कोई बंदोबस्त नहीं है।

नई योजना के तहत संसद की नई इमारत के अलावा केन्द्रीय सचिवालय और मंत्रालयों के लिए भी इमारतें बनाई जाएंगी। सरकार का कहना है कि नई इमारत बनने से सालाना 1000 करोड़ रूपये की बचत होगी। मंत्रालय आपस में मेट्रो से जुड़े होंगे जिससे मंत्रालयों के बीच आपसी समन्वय में सुधार होगा। सरकार का मानना है कि सरकारी कामकाज में सुधार लाने के लिए यह ज़रूरी है कि सभी मंत्रालय एक ही जगह पर हों।

पुराने संसद भवन का क्या होगा ?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ मौजूदा भवन का इस्तेमाल संसदीय आयोजनों के लिए किया जाएगा। 560 फीट डायमीटर वाले मौजूद संसद भवन का निर्माण 1921 में शुरू हुआ था। इसको बनने में छह साल लगे थे और साल 1927 में बनकर तैयार हुआ था। तब इसके निर्माण में करीब 83 लाख रूपये की लागत आई थी। ब्रिटिश काल के इस संसद भवन का डिज़ाइन एडविन लुटियंस हर्बर्ट बेकर ने बनाया था। इसलिए इसे लुटियंस की दिल्ली भी कहा जाता है।

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