सिखों के लिए क्या है बेअदबी?; जिसके लिए 24 घंटों में हुई दो लोगों की लिंचिंग

by Sarfaroshi 6 months ago Views 2336

sacrilege in punjab

पंजाब में बीते दो दिनों में दो मॉब लिचिंग की घटनाएं हुई हैं। शनिवार रात अमृतसर के स्वर्ण मंदिर और कपूरतला जिले में दो लोगों को कथित सिखों के पवित्र ग्रंथ की बेअदबी के लिए भीड़ ने मौत के घाट उतार डाला। पंजाब सरकार ने घटना में SIT जांच का गठन किया है और दो दिनों में रिपोर्ट फाइल करने के आदेश दिए हैं। 

सिखों के लिए ‘बेअदबी’ क्या है?

सिख धर्म के लोग आखरी गुरू गुरू गोविंद सिंह के बाद गुरू ग्रंथ साहिब को ही जीवित गुरू मानते हैं और इससे जुड़ी हर चीज़ को पवित्र मानते हैं। इस ग्रंथ के प्रति होंने वाली किसी अपमान को सिख बेअदबी मानते हैं और सिख सेवा में इस्तेमाल होंने वाली दूसरी चीज़े जैसे कृपाण, रूमाला, पगड़ी आदि से किसी तरह की छेड़छाड़ भी उनके लिए फ़िर बेअदबी माना जाता है। मसलन- ग्रंथ के किसी हिस्से को काटना या फाड़ देना या फ़िर जला बे अदबी की श्रेणी में हैं। 

24 घंटों में दो Mob Lynching 

पंजाब में एक हफ़्ते में तीन बेअदबी की घटना हुईं वहीं 24 घंटों में ही दो लोगों को भीड़ ने बेअदबी के आरोप में पीट पीट कर मार डाला। शनिवार को स्वर्ण मंदिर में एक युवक को भीड़ ने काफ़ी मारा पीटा। आरोप था कि युवक गुरू ग्रंथ साहिब के चारो ओर लगी रैलिंग को पार कर ग्रंथ के पास पहुंचा और ‘रूमाला’, जिसके उपर गुरू ग्रंथ साहिब को रखा जाता है, इसे पैर से कथित तौर पर कुचल दिया। आरोप यह भी है कि उसने कथित तौर पर ग्रंथ साहिब के पास रखी एक तलवार भी अपने हाथ में ले ली।

अधिकारियों ने इस बीच उसे पकड़ा और फ़िर उससे एक कमरे में पूछताछ की गई। इसके बाद व्हीलचेयर पर युवक को SGP हेडक्वॉर्टर ले जाया गया। डीसीपी परमिंदर सिंह भंडारी के अनुसार युवक को हेडक्वॉर्टर लाते वक़्त लगातार उसे पीटा जा रहा था। 

कपूरथला जिले में भी भीड़ ने की हत्या !

शनिवार की लींचिंग को 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि पंजाब के कपूरतला में एक और लिंचिंग की ख़बर आई। कपूरतला जिले के निजामपुर गांव में भी गुरूद्वारे से एक शख़्स को पकड़ा गया। व्यक्ति पर आरोप लगाया गया कि वो निशान साहिब, सिखों के पवित्र झंडे का ‘अपमान’ कर रहा था। यह घटना सुबह क़रीब 4 बजे हुई। 

घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने शख़्स को हिरासत में ले लिया हालांकि गांववासियों ने ज़िद पकड़ ली कि उससे सबके सामने पूछताछ की जाए। इसके बाद ग़ुस्साई भीड़ पुलिस से भी भिड़ गई और व्यक्ति की मॉब लीचिंग कर दी।  

बीते सप्ताह भी रघुवीर सिंह नाम के एक युवक ने गुटका साहिब को स्वर्ण मंदिर में बनी झील में फेंक दिया था। गुटका साहिब एक पॉकेट बुक है जिसमें गुरबानी की कुछ वर्सेज लिखी होती हैं। 

इंडियन एक्सप्रेस ने एक राजनीतिक विज्ञानी के हवाले से लिखा कि यह घटना बार-बार बेअदबी की घटनाओं को लेकर सिख समुदाय के बीच बढ़ी असुरक्षा की भावना को दिखाती है। 

 सिंघु बॉर्डर, जहां प्रदर्शनकारी एक साल से ज़्यादा समय से कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे थे, वहां पर भी कथित तौर पर बेअदबी के लिए पंजाब के एक व्यक्ति को निहंग सिखों के जत्थे ने मार डाला था। शख़्स के हाथ कटे हुए शव को सिंघु सीमा के पास मंच पर लटका हुआ छोड़ दिया गया था। 

आलोचक यह भी मानते हैं कि पवित्र सिख ग्रंथों के साथ बार बार हो रहे बेअदबी के मामले और इनके लिए किसी को अपराधी न ठहराया जाना हिंसा को बढ़ावा दे रहा है। 

फर्स्ट पोस्ट की एक रिपोर्ट मुताबिक 2015 से अब तक 100 से ज़्यादा बेअदबी के मामले सामने आए जिसमें सिखों के पवित्र ग्रंथों के साथ छेड़छाड़ की गई हालांकि इनमें से सिर्फ़ 50 फ़ीसदी केस में आरोप तय किए गए। 

बेअदबी पंजाब में इतना बड़ा मुद्दा बन चुका है कि इसे राजनीतिक पार्टियों ने चुनावी घोषणापत्र तक में शामिल कर लिया है। 2017 विधानसभा चुनावों से पहले कई पार्टियों ने जनता से सरकार में आने पर बेअदबी मामलों के ख़िलाफ़ कदम उठाने का वादा किया था। यहां तक कि 2017 के एक बेअदबी मामले चलते पंजाब की कांग्रेस सरकार भी ख़तरे में गई थी।

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