क्या है Pegasus? जिसने 'हैक' किया पत्रकारों समेत कई भारतीय हस्तियों का फोन

by GoNews Desk 11 months ago Views 2572

Pegasus

इजरायली कंपनी एनएसओ द्वारा बनाया हुआ स्पाइवेयर ‘पेगासस’ एक बार फिर चर्चा में आ गया है। रविवार को सामने आई एक रिपोर्ट में एक अंतराष्ट्रीय संगठन ने दावा किया है कि इजरायली स्पाईवेयर की मदद से भारत के दो केन्द्रीय मंत्रियों, 40 से ज़्यादा पत्रकारों, विपक्ष के तीन नेताओं और एक न्यायाधीश समेत बड़ी तादाद में कारोबारियों और अधिकार कार्यकर्ताओं के 300 से ज़्यादा मोबाइल नंबर हो सकता है कि हैक किए गए हों। बता दें कि पेगासस नाम का ये स्पाईवेयर सिर्फ सरकारी एजेंसियों को ही बेचा जा सकता है। 

क्या है पेगासस 
ये संभावित तौर पर अब तक खासतौर पर निजी कंपनी का बनाया गया सबसे शक्तिशाली स्पाईवेयर है। इस स्पाईवेयर के जो टार्गेट होते हैं उनके फोन में पेगासस को इंस्टॉल किया जाता है। एक बार फोन में इंस्टॉल होने पर आपका फोन सर्विलेंस डिवाइज की तरह काम करता है। मतलब ये कि पेगासस न सिर्फ आपके भेजे गए मैसेज को पढ़ सकता है बल्कि उन्हें कॉपी कर सकता, आपकी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ और कॉल्स भी रिकॉर्ड कर सकता है। 

इसके अलावा पेगासस आपके फोन से आपको फिल्म कर सकता है, फोन का माइक्रोफोन ऑन कर बातचीत रिकॉर्ड कर सकता है और यहां तक कि संभावना है कि ये सटीक तौर पर इसकी भी जानकारी रखता हो कि आप कहां हैं और किससे मिले हैं और इस सब की टार्गेट व्यक्ति को भनक भी नहीं होगी। 

लोग कैसे होतें हैं शिकार 
साल 2016 में शोधकर्ताओं ने पेगासस के एक वर्जन का पता लगाया था। स्पाईवेयर का ये वर्जन टार्गेट को स्पियर-फिशिंग के ज़रिए फंसाता था यानि टार्गेट के फोन पर टेक्स्ट या इमेल के ज़रिए मेलिशियस लिंक भेजा जाता था। टार्गेट बस इस पर क्लिक करेगा और उसका फोन इस स्पाइवेयर से इंफेक्ट हो जाता था लेकिन अब इसने अपना काम और आसान कर लिया है। पेगासेस बनाने वाली एनएसओ ने 'जीरो-क्लिक' के ज़रिए टार्गेट फोन को इंफेक्ट करने की तकनीक विकसित कर ली है। 

अब टार्गेट को किसी मेलिशियस लिंक पर क्लिक करने की ज़रूरत नहीं है बल्कि पेगासस ख़ुद किसी फोन की कुछ खामी के ज़रिए टार्गेटेड डिवाइस में जगह बनाएगा जिसका डिवाइस बनाने वाली कंपनी को अभी तक पता नहीं है और ऐसे में इस खामी या बग को ठीक नहीं किया जा सका है। 

2019 में व्हाट्सएप ने दावा किया था कि एनएसओ के स्पाईवेयर ने इन्हीं खामियों का फायदा उठाते हुए करीब 1,500 डिवाइस को इंफेक्ट कर दिया था। बता दें कि टार्गेट को सिर्फ एक व्हाट्सएप कॉल के ज़रिए पेगासस को डिवाइस में इंस्टॉल किया जा सकता है और इसके लिए टार्गेट के मेलिशियस कॉल उठाने की भी जरूरत नहीं होगी।

न सिर्फ एन्डॉयड बल्कि दिग्गज कंपनी एप्पल भी इस स्पाईवेयर से ख़ुद को बचा नहीं सकी है। पेगासस ने एप्पल के आईमेसेज में मौजूद खामियों के ज़रिए डिवाइस को हैक किया हुआ है। 

शोधकर्ताओं के लिए इस स्पाइवेयर का किसी फोन में होने का पता लगाना बहुत मुश्किल है क्योंकि एक बार सिर्फ फोन शटडाउन करने पर ही इसकी किसी डिवाइस में मौजूदगी के सभी सबूत खत्म हो जाते हैं।

ताज़ा वीडियो