युनाइटेड नेशन की जनरल असेंबली में क्या बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ?

by M. Nuruddin 9 months ago Views 1823

Prime Minister Modi's address at the United Nation
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा- "जब भारत ग्रो करता है, तो दुनिया ग्रो करती है। जब भारत सुधार करता है, तो दुनिया बदलती है।" पीएम मोदी ने कहा- हमारी विविधता ही हमारे मज़बूत लोकतंत्र की पहचान, विकास सर्व-समावेशी, सार्वभौमिक और सभी का पोषण करने वाला होना चाहिए। उन्होंने वैक्सीन मेकर को भारत में मैन्युफैक्चरिंग के लिए किया आमंत्रित किया है। 

प्रधानमंत्री ने युनाइटेड नेशन जनरल असेंबली में अपने संबोधन में कहा, ‘मैं एक ऐसे राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता हूं जिसे लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। इस साल, भारत ने आजादी के 75 साल पूरे किए। भारत के लोकतंत्र की ताकत इस तथ्य में निहित है कि एक युवा चाय विक्रेता चौथी बार संयुक्त राष्ट्र को संबोधित कर रहा है।’


उन्होंने कहा, ‘हां, लोकतंत्र कर सकता है। हां, लोकतंत्र ने किया है। भारत आज एकीकृत विकास को देख रहा है जो कि सभी समावेशी है।

प्रधानमंत्री ने यूएनजीए में कहा, "पिछले सात वर्षों के दौरान, 43 करोड़ लोगों के बैंक खाते खोले गए हैं। 36 करोड़ लोगों का बीमा किया गया है। हमने 3 करोड़ से अधिक घर बनाए हैं। बेघर, घर के मालिक बन गए हैं। हम 17 करोड़ घरों में पाइप से पानी उपलब्ध कराना चाहते हैं।”

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) सत्र के 76 वें सत्र में विश्व नेताओं को संबोधित करते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भूमि मानचित्रण से लेकर ऋण प्रदान करने तक, हम लोगों को अपना घर बनाने का मौका प्रदान कर रहे हैं।"

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारत ने स्वच्छ और पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने की यात्रा शुरू की है।” उन्होंने कहा, "पिछले डेढ़ साल से, दुनिया 100 से अधिक वर्षों में सबसे खराब महामारी से जूझ रही है। मैं उन सभी को श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने कोविड के कारण अपनी जान गंवाई है।” प्रधानमंत्री ने रबिन्द्रनाथ टैगोर की पंक्तियों से अपने संबोधन का समापन किया।

इस बार कम से कम 109 राष्ट्राध्यक्ष और सरकार न्यूयॉर्क में कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र महासभा को व्यक्तिगत रूप से संबोधित करेंगे, जबकि 60 अन्य पूर्व-रिकॉर्ड किए गए वीडियो बयानों के माध्यम से बहस को संबोधित करेंगे। कई विश्व नेता इस सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में पहुंचे, जिसमें कोविड -19 महामारी से लड़ने पर ध्यान कन्द्रित किया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अफ़ग़ानिस्तान पर कहा, “यह सुनिश्चित करना नितांत आवश्यक है कि अफगानिस्तान के क्षेत्र का उपयोग आतंकवाद फैलाने और आतंकवादी गतिविधियों के लिए न हो। हमें यह भी सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि कोई भी देश अफगानिस्तान की नाजुक स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश न करे और अपने स्वार्थ के लिए इसका इस्तेमाल न करे।”

“इस समय अफगानिस्तान के लोगों, महिलाओं और बच्चों, अल्पसंख्यकों को मदद की ज़रूरत है। हमें उन्हें सहायता प्रदान करके अपने कर्तव्यों को पूरा करना चाहिए।”

UNSC में भारत की स्थायी सीट, NSG में प्रवेश के लिए बाइडन का समर्थन

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपित जो बाइडन से मुलाक़ात की। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी पहली व्यक्तिगत द्विपक्षीय बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद या युनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल और परमाणु आपूर्तिकर्ता या न्यक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में स्थायी सदस्यता के लिए अमेरिका के समर्थन की बात कही थी।

क्वाड के नेताओं की व्यक्तिगत बैठक

इस बीच प्रधानमंत्री ने चार देशों अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया के समूंह क्वाड की व्यक्तिगत बैठक में भी हिस्सा लिया। इस दौरान एक बार फिर सभी नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर चर्चा की। व्हाइट हाउस की वेबसाइट पर क्वाड के छपे साझा बयान में कहा गया है, "हम क़ानून के शासन, नेविगेशन और ओवरफ्लाइट की स्वतंत्रता, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता के लिए खड़े हैं।”

क्वाड के संयुक्त बयान में चीन का ज़िक्र नहीं !

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री स्कॉट मॉरिसन, जापानी प्रधानमंत्री योशीहिदे सुगा और भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाक़ात के बाद यह बयान आया। हालांकि चारो नेताओं के बीच हुई इस व्यक्तिगत बैठक के बाद जारी बयान में चीन का ज़िक्र नहीं किया गया है। बाद में एक फैक्टशीट भी जारी की गई जिसमें चीन का कोई ज़िक्र नहीं किया गया।

क्वाड की बैठक में क्या बोले मोदी ?

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि यह समूह लोकतांत्रिक साझेदारों का है, जो भविष्य को लेकर एक तरह की सोच रखते हैं। बाइडन ने कहा, ''कोविड, जलवायु परिवर्तन और उभरती नई टेक्नॉलजी की चुनौतियों से निपटने के लिए हम एकजुट हुए हैं। जब हम छह महीने पहले मिले थे तो इंडो-पैसिफिक में मुक्त आवाजाही को लेकर प्रतिबद्धता ज़ाहिर की थी। मैं अब कह सकता हूँ कि इसे लेकर हमने काफ़ी प्रगति की है।’

मीटिंग में पीएम मोदी ने कहा, "क्वाड के हमारे चार राष्ट्र - भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका - भारत-प्रशांत क्षेत्र की मदद के लिए 2004 में आए सुनामी के बाद पहली बार मिले हैं।’ उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ रही है तो एक बार फिर हम यहां हैं।

क्वाड की बैठक में मुझे भारत ने वैश्विक सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई, कोविड प्रतिक्रिया या प्रौद्योगिकी में सहयोग पर चर्चा करने पर ज़ोर दिया। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि क्वाड में भारत की भागीदारी दुनिया में शांति और समृद्धि स्थापित करेगी।

क्वाड की बैठक में इन मुद्दों पर बनी सहमति

इसके अतिरिक्त, क्वाड के नेताओं ने उत्तर कोरिया से अपने परमाणु हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों पर कूटनीति में शामिल होने का आग्रह किया। हालांकि उत्तर कोरिया ने इसपर रोक लगाने से तब तक इनकार कर दिया है जब तक कि अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंध हटा नहीं दिए जाते।

इनके अलावा क्वाड नेताओं ने वैक्सीन एक्सपोर्ट को लेकर भी चर्चा की जिसमें सभी देशों ने वैक्सीन एक्सपोर्ट शुरु करने के भारत के फैसले का स्वागत किया।

क्वाड की बैठक के बाद, जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने संवाददाताओं से कहा कि देश टीके, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष पर सहयोग करने और हर साल एक शिखर बैठक आयोजित करने पर सहमत हुए हैं। क्वाड नेताओं ने एक छोटे आइसलैंड स्टेट बनाने पर भी विचार किया है, ताकि पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक और पर्यावर्णीय मुद्दों पर काम किया जा सके।

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