अमेरिका पढ़ने जा रहे छात्रों के लिए कॉलेज ने टीकाकरण की क्या शर्त रखी

by GoNews Desk 1 year ago Views 2310

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कोरोना महामारी के बीच अमेरिकी कॉलेजों में आवेदन करने वाले भारतीय छात्रों को बड़ा झटका लगा है. मार्च से लेकर अब तक करीब 400 कॉलेज और विश्वविद्यालयों ने अपने यहां दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए कोरोना वैक्सीन लगवाना अनिवार्य कर दिया है हालांकि इन कॉलेजों ने उन्हीं टीकों से टीकाकरण को मान्यता दी है जो टीके विश्व स्वास्थ्य संगठन से अप्रूव हो चुके हैं. ऐसे में कॉलेज उन छात्रों से दोबारा वैक्सीन लगवाने के लिए कह रहे हैं जिन्होंने भारत में बनी वैक्सीन कोवैक्सीन और रूस की स्पूतनिक वी से टीकाकरण कराया है.

 द न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की कोलंबिया युनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स ने एक भारतीय छात्र से कैंपस में आने के बाद दोबारा टीकाकरण कराने के लिए कहा है जबक ये स्टूडेंट पहले ही कोवैक्सीन की दोनों खुराक ले चुकी है. इसके अलावा भी कई ऐसे अमेरिकी कॉलेज हैं जो सिर्फ उन्ही छात्रों को दाखिला दे रहे हैं जिन्होंने ग्लोबल संस्था से मान्यता प्राप्त वैक्सीन से टीकाकरण कराया है. 

शैक्षिक संस्थाओं द्वारा बनाया गया नियम न सिर्फ चिकित्सा और तार्किक रूप से उलझन पैदा करने वाला है बल्कि इससे छात्रों खासकर भारतीयों को पढ़ाई शुरू करने में परेशानियों का सामना करना होगा. द न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक वह छात्र जो इस साल सेमेस्टर शुरू होने से पहले तक WHO की अप्रूव्ड वैक्सीन नहीं लगाते हैं उन्हें संभवतः कठिन प्रक्रिया से गुजरना होगा.

अमेरिकी छात्रों के पास हालांकि फाइजर, मॉर्डर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी के टीकों का विकल्प है. ये उन आठ वैक्सीन की सूची में शामिल है जिन्हें ग्लोबल संस्था से मान्यता मिल चुकी है जबकि भारतीय छात्रों समेत दूसरेलोगों के लिए मुश्किल पैदा हो गई हैं. 

कोरोना से तीसरे सबसे प्रभावित देश भारत से हर साल 2 लाख लोग अमेरिका पढ़ने जाते हैं. इन दो लाख छात्रों के पास कोवैक्सीन के लिए सिर्फ स्वदेशी कंपनी भारत बायोटेक की बनी कोवैक्सीन और सीरम इंस्टीट्यूट की बनी कोवीशील्ड टीकों के विकल्प के रूप में मौजूद हैं हालांकि देश में टीकों की उपलब्धता में भारी कमी के बीच इन वैक्सीन के लिए भी स्लॉट बुक कर पाना एक अलग चुनौती है. 

भारत की पहली 'मेड इन इंडिया' वैक्सीन कोवैक्सीन को अब तक 11 देशों से मंज़ूरी मिल चुकी है. ईरान, फिलीपींस, मॉरीशस, मैक्सिको, नेपाल, गुयाना, पराग्वे, जिम्बाब्वे और भारत में इस टीके का प्रयोग हो रहा है लेकिन अभी तक वैक्सीन को WHO की इमरजेंसी यूज लिस्टिंग में शामिल नहीं किया गया है हालांकि कंपनी अब ज़ोरो शोरो से बड़े स्तर पर अपनी वैक्सीन को मान्यता दिलाने की कोशिशों में जुट गई है. 

भारत बयोटेक ने हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन से इमरजेंसी यूज लिस्टिंग प्राप्त करने के लिए 90 फीसदी दस्तावेज़ जमा कर दिए हैं. कंपनी ने ब्राज़ील और हंगरी में रेग्यूलेटरी अप्रूवल के लिए भी कागज़ात जमा कर दिए हैं और अमेरिका की फूड एंड ड्रग एजेंसी से अमेरिका में छोटे स्तर पर फेज़-3 के क्लिनिकल ट्रायल के लिए भी बातचीत के अंतिम चरण मे पहुंच चुकी है.

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