पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट : ममता, अधिकारी और इतिहास

by M. Nuruddin 1 year ago Views 2317

अक्सर देखा गया है कि ‘सेक्युलर’ गठबंधन से बीजेपी को ही फायदा हुआ है....

Nandigram seat of West Bengal: Mamta, Adhikari and
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनावी प्रचार में पूरे दम से जुटी हैं। ममता, नंदीग्राम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं। दूसरी तरफ बीजेपी ने टीएमसी के बाग़ी शुभेंदू अधिकारी को नंदीग्राम से मैदान में उतारा है। नंदीग्राम, शुभेंदू अधिकारी का विधानसभा क्षेत्र है जहां से उन्होंने 2016 में टीएमसी की टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। सीएम ममता पूरे जोश के साथ सिर्फ नंदीग्राम सीट से ही परचा भर रही हैं। ऐसे में ये चुनाव शुभेंदू अधिकारी के कैरियर का सवाल भी है।

नंदीग्राम, कोलकाता से 130 किलोमीटर दूर है। यहां मतदान 1 अप्रैल को दूसरे चरण में होना है। इस सीट पर हार-जीत की अटकलें लगना तो शुरु हो गई है लेकिन इस सीट का इतिहास काफी इंटरेस्टिंग है। साल 1967 में यहां पहली बार चुनाव हुआ था। तबसे इस सीट पर विधानसभा चुनावों के नतीज़े देखें तो यहां लेफ्ट का प्रभुत्व रहा है।


ऐतिहासिक चुनावी नतीज़े

पिछले विधानसभा चुनावों के आंकड़ों से पता चलता है कि नंदीग्राम सीट पर सीपीआई को आठ बार जीत मिली है। वहीं जनता पार्टी को एक, सीपीआईएम को एक, कांग्रेस को एक और टीएमसी को तीन बार जीत मिली है। जबकि बीजेपी लगातार इस सीट पर तीसरे दर्जे की ही पार्टी रही है। बीजेपी को 2016 के चुनाव में 10,713 और 2011 में 5,813 वोट मिले थे। जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को 62 हज़ार से ज़्यादा वोट मिले। लेकिन माना जाता है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदाताओं के मतदान का पैटर्न अलग-अलग है। ऐसे में टीएमसी छोड़ बीजेपी में शामिल हुए शुभेंदू पार्टी के लिए एक अहम् उम्मीदवार हैं।

इस सीट पर सीपीआई ने 1967, 1969, 1971, 1972, 1982, 1987, 1991 और 2006 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की। वहीं जनता पार्टी को 1977, कांग्रेस को 1996 और 2001 में सीपीआईएम के कैंडिडेट जीते थे। इसके बाद यह सीट लगातार टीएमसी के क़ब्ज़े में रहा है। नंदीग्राम सीट पर टीएमसी को 2009 के उप चुनाव, 2011 और 2016 के विधान सभा चुनाव में जीत मिली। लेकिन अब माना जा रहा है कि शुभेंदू के पाला बदलने से समिकरण बदल सकते हैं।

ममता और शुभेंदू

शुभेंदू अधिकारी, ममता बनर्जी के करीबी और पार्टी के कद्दावर नेताओं में एक थे। उन्हें 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में भी जीत मिली। लेकिन 2016 में ममता ने उन्हें विधानसभा का टिकट दिया और जीत के बाद उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया। माना जाता है कि शुभेंदू का पश्चिम बंगाल की राजनीति में मज़बूत पकड़ है।

यही वजह है कि अमित शाह ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी में शामिल कर लिया और नंदीग्राम सीट से ममता के ख़िलाफ़ मैदान में उतार दिया। उन्होंने ममता बनर्जी को 50 हज़ार वोटों से हराने की चेतावनी दी है और ममता भी यह चेतावनी दे चुकी हैं कि वो अधिकारी को उन्हीं के विधानसभा क्षेत्र में हराएंगी। 

मुस्लिम मतदाता और ध्रुविकरण

राज्य के इस विधानसभा क्षेत्र में दो लाख 46 हज़ार मतदाता हैं। इनमें करीब 59.37 फीसदी हिंदू और 40 फीसदी से ज़्यादा मुस्लिम वोटर है। 2016 में शुभेंदू को एक लाख 34 हज़ार से ज़्यादा वोट मिले थे यानि कुल मतदान का करीब 63 फीसदी। टीएमसी में होने से भारी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं ने अधिकारी के पक्ष में मतदान किया था। अब अधिकारी के बीजेपी में शामिल होने से उनका ये वोट छिटकना तय है।

माना जा रहा है कि इसका फायदा ममता बनर्जी को ही होगा। लेकिन लेफ्ट, कांग्रेस और आईएसएफ के गठबंधन की वजह से मुस्लिम वोट बंट सकते हैं। इतना ही नहीं माना जा रहा है कि इस महागठबंधन की वजह से हिंदू वोटों का जमकर ध्रुविकरण हो सकता है। अक्सर देखा गया है कि इस तरह के ‘सेक्युलर’ गठबंधन से बीजेपी को ही फायदा हुआ है। ऐसे में नंदीग्राम में ममता की राह भी आसान नहीं होगी।

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