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पश्चिम बंगाल चुनाव: कांग्रेस-लेफ्ट-आईएसएफ रैली के क्या मायने हैं ?

by M. Nuruddin 1 month ago Views 1397

अब अगर यह गठबंधन सीट बंटवारे में कामयाब होता है तो ममता के लिए बड़ा ख़तर पैदा होना तय है...

What does the Congress-Left-ISF rally mean?
कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में कांग्रेस, लेफ्ट और इंडियन सेक्युलर फ्रंट की रैली चर्चा में है। रविवार को इस विशाल रैली में लाखों की संख्या में लेग जुटे। माना जा रहा है कि यह गठबंधन चुनाव में एक तीसरे मोर्चे के तौर पर खड़ी होगी। अबतक राज्य के विधानसभा चुनाव को टीएमसी बनाम बीजेपी माना जा रहा था। राज्य में 27 मार्च से आठ चरणों के लिए वोटिंग शुरु होगी।

हालांकि कांग्रेस को लेकर गठबंधन में अभी भी मनमुटाव सा है। सीट बंटवारे को लेकर आईएसएफ प्रमुख अब्बास सिद्दीकी का कहना है कि वो एक भागीदारी बनने और अपने सही दावे के लिए रैली में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि लेफ्ट पार्टी के साथ सीट बंटवारे को लेकर पहले ही समझौता हो चुका है जबकि कांग्रेस अभी बातचीत में है। रैली में अब्बास सिद्दीकी ने ममता बनर्जी पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया और कहा कि जनता उन्हें ‘सबक सिखाएगी।’ हालांकि पिछले दोनों चुनावों में उन्होंने ममता के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। 


रैली में कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी समेत कांग्रेस के बड़े नेता भी रैली में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने से साबित होता है कि आगामी चुनाव दो दलों के बीच नहीं होगा। सीपीआई महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि आरएसएस-भाजपा की सांप्रदायिक गतिविधि को रोकने के लिए यह ज़रूरी है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पहले तृणमूल कांग्रेस को हराया जाए।

ज़ाहिर है, अगर लेफ्ट, कांग्रेस और आईएसएफ एक मोर्चे के तौर पर खड़ा होता है तो इसका नुकसान तृणमुल को होना तय है। माना जाता है कि ममता बनर्जी के दोनों कार्यकल में मुस्लिम मतदाताओं की अहम् भूमिका रही है। पश्चि बंगाल में मुर्शिदाबाद, नादिया, मालदा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना समेत 67 ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं जहां 40 फीसदी मुस्लिम मतादाता हैं।

जानकार मानते हैं कि पिछले चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं के बीच कांग्रेस और लेफ्ट के वोट शेयर में व्यवस्थित रूप से गिरावट देखी गई है। इसी का फायदा ममता को होता रहा है। अब अगर यह गठबंधन सीट बंटवारे में कामयाब होता है तो ममता के लिए बड़ा ख़तर पैदा होना तय है।

इसका बीजेपी को कितना नुकसान होता है यह देखने वाली बात होगी। बीजेपी राज्य में सिर्फ हिन्दू मतदाताओं पर ध्यान दे रही है। राज्य में सबसे बड़ी आबादी हिन्दुओं की है। बीजेपी के नेता खुलेआम कहते हैं कि उन्हें 'पश्चिम बंगाल की 70 फीसदी हिन्दू आबादी का साथ है।' अक़्सर देखा गया है कि ध्रुविकरण से बीजेपी को मुनाफा ही होता है।

अगर 2016 विधानसभा चुनाव में लेफ्ट और कांग्रेस के प्रदर्शन की बात करें तो विधानसभा में लेफ्ट के 27 विधायक हैं और कांग्रेस के 44 विधायक हैं। 2016 के चुनाव में लेफ्ट के मोर्चों का वोट शेयर 20.2 फीसदी था जबकि कांग्रेस का वोट शेयर 12.25 फीसदी रहा था।

वहीं पिछले चुनाव में बीजेपी ने 291 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था और सिर्फ तीन ने जीत दर्ज की थी। पार्टी का वोट शेयर 10.1 फीसदी रहा था। जबकि टीएमसी के 293 उम्मीदवारों में से 211 जीते थे और पार्टी का वोट शेयर करीब 45 फीसदी रहा था और ये ममता बनर्जी की सबसे बड़ी जीत थी।

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