किसान आंदोलन को ख़ालिस्तानी लेबल लगाने की सोची-समझी साज़िश का पर्दाफाश: CIR रिपोर्ट

by M. Nuruddin 1 week ago Views 1409

Well-intentioned conspiracy to label farmers' move
एक ब्रिटिश नॉन प्रोफिट ऑर्गेनाइज़ेशन या ग़ैर लाभकारी संस्था ने सोशल मीडिया पर किसानों को ख़ालिस्तान से जोड़ने की एक सोची-समझी साज़िश का खुलासा किया है। इसी ऑर्गेनाइज़ेशन ने पहले म्यांमार में ह्युमन राइट्स के ख़िलाफ़ अपराधों के साथ-साथ नकली सोशल मीडिया हैंडल से चीनी प्रचार का खुलासा किया था।

नॉन प्रोफिट ऑर्गेनाइज़ेशन सेंटर फॉर इंफॉर्मेशन रेजिलिएंस (CIR) ने किसानों के ख़िलाफ़ भड़काऊ और झूठे पोस्ट करने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स का विश्लेषण किया है। इससे पता चला कि सोशल मीडिया पर सैकड़ों फेक अकाउंट्स थे जिससे किसान आंदोलन के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार, पंजाब में अलगाववाद और भारतीय सेना के ग्लोरिफिकेशन या उनके महिमामंडन, भारत और अंतर्राष्ट्रीय समुदायों के भीतर सांस्कृतिक तनाव को बढ़ावा दिए जाने वाले पोस्ट किए गए थे।


सीआईआर ने ऐसे 80 सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की है जिनपर हज़ारों की संख्या में फॉलोअर्स थे। रिपोर्ट में बताया गया कि अब उन सोशल मीडिया अकाउंट को निलंबित कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक़ उन सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान ट्विटर एपीआई, हैशटैग और विज़ुअलाइज़्ड डेटा के इस्तेमाल से की गई थी।

नकली नाम, “असली दोस्त”, नकली पोस्ट !

रिसर्च रिपोर्ट जारी करने वाले सीआईआर के जांच निदेशक बेंजामिन स्ट्रिक के मुताबिक़ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कोर नेटवर्क के माध्यम से अपने पोस्ट को बढ़ावा दिया जाता था। उनके मुताबिक़ फेक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर सेलिब्रिटी की तस्वीरें लगी थी और सिख समुदाय जैसा दिखने के लिए वे सिख नामों और सिख टाइटल का इस्तेमाल करते थे।

रिपोर्ट के मुताबिक़ ट्विटर पर 33 अकाउंट्स की पहचान की गई जिनमें 18 ऐसे अकाउंट थे जिनके नाम में “कौर” टाइटल का इस्तेमाल किया गया। कौर, सिख महिलाओं का उपनाम है और इसका मतलब प्रिंसेज़ या राजकुमारी होता है। इनके अलावा दहिया, सिंह और संधू जैसे टाइटल का इस्तेमाल किया गया था, जिनमें कुछ प्रमुख गुंजन कौर, सिमरन कौर, तनवीर संधू, चिरागदीप दहिया जैसे नाम शामिल थे।

बायो में “प्राउड इंडियन, हिंदू, लव, नेशनलिस्ट, जय”

रिपोर्ट में बताया गया है कि किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए उन फेक सेशल मीडिया अकाउंट्स पर “असली सिख” और “प्राउड इंडियन” जैसे बायो लगाए गए थे। लगभग फेक अकाउंट के बायो में “प्राउड इंडियन, हिंदू, लव, नेशनलिस्ट, जय” जैसे बहुत ज़्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।

रिपोर्ट में यह भी बताया कि ऐसे कई सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान हुई जिनके एक ही नाम से ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर भी अकाउंट थे और उन अकाउंट से एक ही जैसे पोस्ट सभी प्लेटफॉर्म पर साझा किए जा रहे थे।

आंदोलन को बदनाम करने के लिए ट्विटर पर शुरु किए गए अभियान में रिपोर्ट के मुताबिक़ “#RealSikhAgainstKhalistanis #Khalistanis #SikhRejectKhalistan” जैसे हैशटैग का इस्तेमाल किया गया था।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई अकाउंट से सेना से संबंधित पेस्ट किए जा रहे थे और “राष्ट्रवादियों” से उन समूहों, जिन्हें वे चरमपंथी या ख़ालिस्तानी का लेबल लगाने की कोशिश कर रहे थे, को “काउंटर करने और बेनकाब करने” की अपील की गई थी।

एक ही जैसे नाम, एक ही जैसे काम !

रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक़ आंदोलन को बदनाम करने के लिए ट्विटर पर जिन अकाउंट का इस्तेमाल किया गया था उनपर 2000-6000 तक फॉलोअर्स थे। मसलन इन अकाउंट पर फॉलोइंग और फॉलोअर्स की संख्या लगभग समान देखी गई।

सीआईआर ने जिन अकाउंट की पहचान की है वो नागरिकों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे थे और वे ऑटोमेटेड नहीं थी और इन सभी अकाउंट से एक ही हैशटैग के साथ कई पोस्ट किए जाते थे।

सोशल मीडिया पर कोर नेटवर्क के रूप में ट्विटर पर 33 फेक अकाउंट की पहचान हुई जिनपर कुल 84,000 फॉलोअर्स थे। इनके अलावा कुल 80,000 फ्रेंड्स के साथ 29 फेसबुक अकाउंट, जिनमें 22 ऐसे थे जिनके ट्विटर पर भी एक ही नाम, एक ही इमेज, एक ही कवर के साथ अकाउंट थे और एक जैसे पोस्ट किए जाते थे। जबकि 18 इंस्टाग्राम अकाउंट की भी पहचान हुई।

इन सभी फेक अकाउंट में 14 ऐसे अकाउंट की पहचान हुई जिनके सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट थे।

सीआईआर की यह रिसर्च रिपोर्ट उन मंत्रियों, विधायकों, कार्यकर्ताओं, नेताओं और उन टीवी मीडिया के लिए क़रारा जवाब है जिन्होंने किसान आंदोलन पर ख़ालिस्तानी लेबल लगाने की पुर्जोर कोशिश की लेकिन नाकामयाब साबित हुए।

ताज़ा वीडियो