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गणतंत्र दिवस पर राजधानी दिल्ली में हिंसा, विदेशी मीडिया में मोदी सरकार की किरकिरी

by GoNews Desk 1 month ago Views 1636

ब्लूमबर्ग ने किसान आंदोलन को लेकर एक ओपीनियन पीस लिखा है जिसमें कहा गया है कि ‘भारत के मोदी को खेती पर स्थिर रहना चाहिए।’

Violence in the capital on Republic Day, Modi gove
गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों के ट्रैक्टर परेड के दौरान राजधानी दिल्ली में हिंसा हो गई। इस दौरान आंदोलित भीड़ में से कुछ लोग लाल क़िले के भीतर घुस गए और क़िले की प्राचीर पर सिखों के धार्मिक झंडे निशान साहब को लगा दिया। इस दौरान एक किसान की मौत भी हुई जिसका आरोप दिल्ली पुलिस पर लगाया जा रहा है। हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने अबतक 22 एफआईआर दर्ज किए हैं।

परेड के दौरान किसान और पुलिस में हिंसक झड़पें हुई जिसमें 83 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। कम से कम 20 ट्रैक्टर लाल क़िले के भीतर घुसे थे। इसके बाद लाल क़िले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इनके अलावा लाल क़िला, जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर एंट्री बंद कर दी गई है। वहीं तनावपूर्ण हालात को देखते हुए हरियाणा के तीन ज़िलों में शाम 5 बजे तक टेलीकॉम सेवाएं बंद कर दी गई है।


गणतंत्र दिवस के मौके पर राजधानी में भड़की हिंसा को लेकर विदेशी मीडिया ने सरकार की कड़ी आलोचना की है। द न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ‘भारतीय किसानों का प्रदर्शन मोदी के लिए चुनौति’ बन गया है। अख़बार ने लिखा, ‘हज़ारों प्रदर्शनकारी किसानों ने मंगलवार को भारत की राजधानी नई दिल्ली में प्रदर्शन किया। ट्रैक्टर से उन्होंने बैरिकेड्स हटा दिए। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे जिससे अराजकता फैल गई। यह सरकार को सीधी चुनौती है।’

द वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा, ‘गुस्साए किसानों ने नई दिल्ली में हज़ारों ट्रैक्टर चलाए। अख़बार ने लिखा, ‘दंगा पुलिस ने कई जगहों पर आंसू गैस के गोले दागे और पानी की तेज धार छोडी । किसानों ने ट्रैक्टर से कंक्रीट और लोहे के बैरिकेड को हटा दिया। पुलिस अधिकारियों ने किसानों को राजधानी के केन्द्र तक पहुंचने से रोकने की कई कोशिशें की। कंटेनरों और बसों से सड़क जाम कर दिए गए थे।’

बीबीसी वर्ल्ड ने लिखा है कि भारी प्रदर्शन में पुलिस के साथ भिड़े किसान। बीबीसी ने लिखा, ‘कृषि सुधारों के विरोध में हज़ारों किसानों ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में प्रवेश किया। इस दौरान किसानों ने बैरिकेड्स हटा दिए और उनपर आंसू गैस के गोले दागे गए। कई प्रदर्शनकारी तय रास्तों से अलग हो गए और रास्ते में पुलिस के साथ झड़पें हुई।’

अलजज़ीरा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, ‘राजधानी में किसानों की रैली के दौरान भारतीय पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। अख़बार ने लिखा, ‘राजधानी नई दिल्ली में दसियों हज़ार भारतीय किसानों की रैली हिंसक हो गई, पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज किया गया। किसानों ने शहर में प्रवेश के लिए बैरिकेड्स तोड़ दिए। किसान पिछले साल नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पारित तीन कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं।’

द गार्डियन ने लिखा कि भारत में नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने राजधानी दिल्ली के चारों तरफ लगाए गए बैरिकेड्स तोड़ दिए और शहर के ऐताहिसक लाल क़िले में घुस गए। अराजकता और हिंसा गणतंत्र दिवस समारोह पर भारी पड़ गया। पुलिस ने मंगलवार को राजधानी में मार्च कर रहे किसानों पर लाठी-डंडों के साथ आंसू गैस के गोले दागे। हिंसा में एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए।’

वहीं ब्लूमबर्ग ने किसान आंदोलन को लेकर एक ओपीनियन पीस लिखा है जिसमें कहा गया है कि ‘भारत के मोदी को खेती पर स्थिर रहना चाहिए।’ ब्लूमबर्ग ने लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार में छटपटाहट दिख रही है। लेकिन उन्हें स्थिर रहना चहिए। उनके बदलावों से किसान आंदोलन पर उतर आए हैं। बदलाव पहले की तुलना में भारतीय कृषि की सबसे अचूक समस्याओं को दूर करने वाले हैं। उन बदलावों को संरक्षित करने की ज़रूरत है, त्यागने की नहीं।’

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