'बहुत घटिया': दिल्ली दंगों की जांच को लेकर अदालत की टिप्पणी

by Sarfaroshi 4 months ago Views 1838

Delhi riots

दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को साल 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों की जांच को लेकर पुलिस की खिंचाई की है। अदालत ने कहा है कि दिल्ली दंगों के काफी सारे मामलों में जांच का मापदंड ‘बहुत घटिया’ है। कोर्ट ने साथ ही जांच में दिल्ली पुलिस आयुक्त के हस्तक्षेप की ज़रूरत बताई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) विनोद यादव ने अशरफ अली और परवेज अली पर 25 फरवरी 2020 को दिल्ली पुलिस अधिकारियों पर कथित तौर पर तेज़ाब, कांच के टुकड़े और ईंट फेंकने को लेकर आरोप तय करते हुए ये टिप्पणी की है। 

एएसजे ने कहा, ‘यह कहते हुए पीड़ा होती है कि दंगे के बहुत सारे मामलों में जांच का मापदंड बहुत घटिया है।’ उन्होंने कहा कि ज्यादातर मामलों में जांच अधिकारी अदालत में पेश (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये भी) नहीं हो रहे हैं। न्यायाधीश ने कहा कि पुलिस आधे-अधूरे आरोप-पत्र दायर करने के बाद जांच को तार्किक परिणति तक ले जाने की बमुश्किल ही परवाह करती है, जिस वजह से कई आरोपों में नामजद आरोपी सलाखों के पीछे बने हुए हैं।’

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक ये मामला सशस्त्र सीमा बल की 65वीं बटालियन के एक कॉन्स्टेबल की शिकायत पर आधारित है जिस पर 25 फरवरी को शिव विहार के पास भीड़ ने हमला कर दिया था। अदालत ने दो आरोपियों अशरफ अली और परवेज अली के खिलाफ तेज़ाब से गंभीर चोंट पहुंचाना, लोक सेवक को अपने कर्तव्य से रोकना और आईपीसी की अन्य धाराओं के तहत आरोप दर्ज किए।

अदालत ने इस दौरान कहा कि मामल में जांच अधिकारी इन आरोपों पर बहस करने के लिए अभियोजकों को ब्रीफ नहीं कर रहे हैं। एएसजे यादव ने इस मामले में आदेश की प्रति दिल्ली आयुक्त के पास ‘उनके संदर्भ एवं सुधार के कदम उठाने के वास्ते (उनके द्वारा) जरूरी निर्देश देने के लिए’  भेजे जाने के भी निर्देश दिए। 

अदालत ने कहा, ‘वे इस संबंध में विशेषज्ञों की राय लेने के लिए स्वतंत्र हैं, अन्यथा इन मामलों में शामिल लोगों के साथ नाइंसाफी होने की संभावना है.’

अभियोजन पक्ष के वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि उनके मुवक्किलों को मामले में झूठी तरह से फंसाया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपियों का नाम शिकायतकर्ता ने नहीं लिया है और वह 100-150 लोगों की भीड़ द्वारा हमले में आरोपित हैं वहीं विशेष लोक अभियोजक आरसीएस भदौरिया ने तर्क दिया कि 65वीं बटालियन को बहुत ही कम सम के नोटिस पर तैनात किया गया था और इसलिए वह विशेष रूप से आरोपी व्यक्तियों का नाम/पहचान नहीं कर सके हालांकि उन्होंने आगे कहा कि आरोपियों को स्वतंत्र गवाह ने स्पष्ट रूप से पहचाना है। 

ग़ौरतलब है कि पिछले साल फरवरी के अंत में राजधानी दिल्ली में सीएए के समर्थकों और विरोधियों के बीच दंगे भड़क गए थे। इन दंगों में 53 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी जबकि 700 लोग घायल हुए थे।

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