वैक्सीन पॉलिसी में बदलाव; विपक्ष की मांग के मुताबिक खरीददारी करेगी केंद्र, वितरण करेगी राज्य सरकार

by GoNews Desk 11 months ago Views 2270

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पीएम मोदी ने सोमवार को अपनी पुरानी टीकाकरण नीति से यू-टर्न ले लिया है जिसके बाद अब एक बार फिर कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान की बागडोर केंद्र के हाथ में आ गई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 मई को भारतीय सरकार की उदारीकृच टीकाकरण नीति का ऐलान किया था जिसके अंतर्गत केंद्र ने राज्यों को 18-44 साल के लोगों के टीकाकरण के लिए टीकों की 25 फीसदी खुराक वैक्सीन निर्माता कंपनियों से खरीदने की इजाज़त दी थी जबकि खुद केंद्र 45 साल से अधिक उम्र के लोगों को मुफ्त टीकाकरण की सुविधा दे रहा था हालांकि अब सरकार ने टीकाकरण गाइडलाइन 1.0 को कुछ बदलावों के साथ फिर से लागू कर दिया है. इसके तहत अब केंद्र सरकार ही वैक्सीन निर्माता कंपनियों से टीके खरीदेगी और उन्हें राज्यों को मुफ्त में देगी. 

टीकाकरण नीति 2.0
गौरतलब है कि कई राज्यों की ओर से पीएम को पत्र लिख कर टीकाकरण नीति का विकेंद्रीयकरण करने की मांग की थी. इसके अंतर्गत राज्यों ने सरकार से स्वतंत्र हो कर टीके खरीदने की इजाज़त देने की अपील की थी. सरकार ने राज्यों की इस मांग कोो मानते हुए 1 मई को घोषणा की केंद्र देश में कुल वैक्सीन उत्पादन का 50 फीसदी हिस्सा खरीदेगा जबकि राज्य 25 फीसदी हिस्सा और निजी संस्थाएं टीकों की 25  फीसदी खुराक खरीद पाएंगी.

इसके साथ ही राज्यों को 18-44 साल के लोगों का पेड वैक्सीनेशन करने के निर्देश दिए गए थे हालांकि केंद्र की इस नई टीकाकरण नीति 2.0 ने राज्यों के सामने कई मुश्किलें खड़ी कर दी. इस नई नीति के तहत केंद्र को तो टीके की खुराक 150 में मिल रही थी वहीं राज्यों को इस खुराक के लिए दोगुने जबकि निजी संस्थाओं को तिगुने दाम देने पड़ रहे थे इससे राज्यों ने उन पर आर्थिक बोझ बढ़ने की बात कही वहीं दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों ने शिकायत की कि कोवैक्सीन  बनाने वाली भारत बायोटेक जैसी वैक्सीन निर्माता कंपनियां उन्हें सीधे तौर पर टीके उपलब्ध नहीं करा रही हैं.

केंद्र के इस मामले को नज़रअंदाज़ करता हुआ देख राज्यों ने टीकों की सप्लाई का काम अपने हाथों में लिया और महाराष्ट्र, केरल, पंजाब एवं उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने वैक्सीन की सप्लाई के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किए. केंद्र की नई टीकाकरण नीति के ऐलान के बाद राज्यों को वैक्सीन सप्लाई प्राप्त करने में खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ा जिसके चलते देश में टीकाकऱण अभियान पटरी से उतर गया. 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
राज्यों की परेशानियों को लेकर केंद्र सरकार के गैर ज़िम्मेदाराना बर्ताव को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार टीकाकरण नीति में मौजूद खामियों पर सुनवाई की और केंद्र से एक बहतर वैक्सीनेशन पॉलिसी लाने के लिए कहा. सुप्रीम कोर्ट के 2 जून को पब्लिश आदेश में कहा गया था कि केंद्र सरकार को अपनी टीकाकऱण नीति में मौजूद खामियों को स्वीकार करना चाहिए और उन्हे बहतर करना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की पिछली टीकाकऱण नीति की विकेंद्रीयकृत खरीद, एक ही टीके के अलग अलग दाम और 18-44 साल के लोगों के पेड वैक्सीनेशन को लेकर आलोचना की थी. अदालत ने कहा था कि अगर केंद्र को टीके की एक खुराक 150 रूपये में मिल रही है जबकि इसी खुराक के लिए राज्यों को दोगुने दाम देने पड़ रहे हैं तो खुद केंद्र 100 फीसदी टीकों को खरीद कर राज्यों को क्यों नहीं देता.

अदालत ने साथ ही कहा था कि अगर राज्य 18-44 आयु वर्ग के लोगों के लिए टीके के पैसे दे रहे हैं तब भी ये पैसा राज्यों को जनता से ही मिलता है तो अंत में नुकसान सिर्फ जनता का ही है. सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 14 के तहत केंद्र की टीकाकऱण नीति के औचित्य पर सवाल उठाए थे और साथ ही सरकार से बजट में वैक्सीनेश के लिए निकाले गए 35,000 करोड़ रूपयों का भी लेखा जोखा मांगा था.

 केंद्र की पिछली टीकाकरण नीति में न सिर्फ कई खामियां थीं बल्कि ये उलझन से भी भरी हुई थी. ये पता लगाना मुश्किल था कि किस राज्य को कब तक वैक्सीन की कितनी खुराक उपलब्ध होगी हालांकि अब सरकार ने वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर सभी बातों को साफ कर दिया है. अब साफ हो गया है कि सरकार वैक्सीनेशन पर 35,000 करोड़ नहीं बल्कि 45,000 करोड़ खर्च करेगी हालांकि वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में सरकार ने सिर्फ 4,000 करोड़ ही वैक्सीनेश पर खर्च किए हैं.

केंद्र सरकार ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि उसे किस कंपनी से कब तक और कितनी टीकों की खुराक मिलेगी. केंद्र की दी जानकारी के अनुसार भारत में कुल 94 करोड़ लोग हैं जिनका टीकाकरण किया जाना है. इनके टीकाकऱण के लिए 188 करोड़ टीकों की खुराक की आवश्यकता होगी. 

विपक्ष का दावा
गौरतलब है कि मुख्य विपक्ष पार्टी की ओर से पिछले कई दिनो से ये मांग की जा रही थी कि केंद्र सरकार को टीको की खरीद  जिम्मा अपने हाथों में ले लेना चाहिए और इनके वितरण की ज़िम्मेदारी राज्यों को दी जाए तभी सभी लोगों तक वैक्सीन पहुंचाई जा सकती है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 24 मई को किए गए एक ट्वीट में लिखा था, "वैक्सीन की ख़रीद केंद्र करे और वितरण राज्य- तभी हर गाँव तक वैक्सीन सुरक्षा पहुँच सकती है." अब टीकाकरण नीति में ठीक यही बदलाव होंने पर विपक्ष का कहना है कि केंद्र ने उसकी सलाह मान कर नए टीकाकऱण नीति की घोषणा की है. 

कहां से कितनी वैक्सीन?
केंद्र ने बताया है कि भारत में 16 जनवरी को टीके की पहली खुराक दी गई थी तबसे ले कर 31 जुलाई तक टीकों की 53.6 वैक्सीन उपलब्ध होगी. इनमें से 23 करोड़ वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है. केंद्र के अनुसार उसका लक्ष्य अब 16 जनवरी से 31 दिसंबर 2021 तक वैक्सीन की 187.2 करोड़ खुराक उपलब्ध कराना है. 1 अगस्त से 31 दिसंबर तक लगभग 133.6 करोड़ वैक्सीन उपलब्ध होंगी जिसका अर्थ हुआ कि लगभग 90 लाख लोगों को औसतन रोज वैक्सीन दी जाएगी हालांकि मौजूदा समय में रोज टीकाकऱण का औसत 33 लाख के आसपास है.

केंद्र ने इसकी भी जानकारी दी है कि उसे कितनी खुराक कौन सी कंपनी से मिलेगी. सरकार की दी जानकारी के अनुसार जुलाई और दिसंबर के बीच उसे सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड की 50 करोड़, भारत बायोटेक की कोवैक्सीन की 38.6 करोड़, बायो-ई से 30 करोड़, जाइडस कैडिला से 5 करोड़ और स्पूतनिक वी की 10 करोड़ खुराक प्राप्त होगी. इन 133.6 करोड़ खुराकों में विदेशों से आने वाली वैक्सीन को शामिल नहीं किया गया है.

भारत सरकार अभी जॉनसन एंड जॉनसन, फाइजर और मॉर्डर्ना जैसी कंपनियों की वैक्सीन के भारत में इस्तेमाल को लेकर बातचीत के दौरा में है. टीकों की कीमत की बात करें तो केंद्र सरकार को 31 जुलाई तक मिलने वाली टीकों की खुराक के दाम पहले की तरह ही होंगे. इसके बाद नीती आयोग के सदस्य टीकों के नए दामों का ऐलान करेंगे. 

अब तक टीकाकरण का ब्यौरा
इस बीच बता दें कि MoHFM के 7 जून के आंकड़ें बताते हैं कि भारत में अब तर सिर्फ 23.28 करोड़ लोगों को ही टीकों की खुराक दी गई है. इनमें से भी 4.63 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें टीको की दोनों खुराक दी गई है जबकि शेष 18.65 को सिर्फ एक खुराक मिली है. वैक्सीन की दोनों खुराकों से टीकाकृत किए गए लोगों में 45 साल या उससे अधिक उम्र के 3.06 करोड़ लोग शामिल हैं. वहीं 68 लाख स्वास्थ्य कर्मचारियों, 87 लाख फ्रंटलाइन वर्कर्स जबकि 18-44 साल के सिर्फ 20 लाख लोग शामिल हैं. कोरोना रोधी वैक्सीन की सिंगल शॉट अब तक 45 या उससे अधिक उम्र के 13.17 करोड़ लोगों, 1 करोड़ स्वास्थ्य कर्चारियों, 1.62 करोड़ फ्रंटलाइन वर्कर्स  और 18-44 साल के 2.86 करोड़ लोगों को दी जा चुकी है.
 

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