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उत्तर प्रदेश: बिजली कंपनियों के निजीकरण के ख़िलाफ़ मशाल जुलूस, बड़े आंदोलन की तैयारी

by Shahnawaz Malik 3 weeks ago Views 836
Uttar Pradesh: Torch procession against the privat
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उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू हो गया है. विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की अपील पर पूरे सूबे में मशाल जुलूस निकाला गया. पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और सीएम योगी के गृह ज़िला गोरखपुर में भी प्रदर्शनकारी हाथों में मशाल लेकर निजीकरण के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करते हुए देखे गए.

आंदोलनकारियों का आरोप है कि 5 अप्रैल को 2018 को राज्य सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बीच एक समझौता हुआ था. तब सरकार राज़ी हो गई थी कि विद्युत वितरण कंपनियों का निजीकरण नहीं किया जाएगा लेकिन अब उसने यह समझौता तोड़ दिया और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण करने की दिशा में आगे बढ़ गई है. समिति का कहना है कि निजीकरण और फ्रैंचाइज़ी का मॉडल ग्रेटर नोएडा और आगरा में फेल हो गया, फिर योगी सरकार एक नाकाम मॉडल पर बार-बार प्रयोग क्यों करना चाहती है.

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देश में विद्युत वितरण कंपनियां सबसे ज़्यादा घाटे में उत्तर प्रदेश में चल रही हैं. केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के उदय पोर्टल के मुताबिक मार्च 2020 तक यूपी की पांच डिस्कॉम कंपनियों को 819 करोड़ का घाटा हुआ था. राज्य में कुल पांच बिजली कंपनियां हैं जिनमें से मेरठ स्थित पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम और कानपुर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी फ़ायदे में हैं जबकि दक्षिणांचल, मध्यमांचल और पूर्वांचल को नुकसान उठाना पड़ रहा है. उदय पोर्टल के मुताबिक सबसे ज़्यादा 1550 करोड़ का नुकसान पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को उठाना पड़ रहा है. योगी सरकार ने राज्य में बिजली महंगी भी की लेकिन इसके बावजूद घाटा बरक़रार है.

पूर्वांचल में ही गोरखपुर और वाराणसी जैसे हाई प्रोफ़ाइल संसदीय क्षेत्र हैं और इस पूरे इलाक़े में बीजेपी का ख़ासा दबदबा है. योगी सरकार का तर्क है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लगातार घाटे में चल रही है और निजीकरण करके इस नुकसान से आज़ादी पाई जा सकती है. वहीं बिजली विभाग के आंदोलनकारियों का कहना है कि निजीकरण का फ़ैसला न तो कर्मचारियों के हित में है और न ही इससे आम जनता को फ़ायदा होने वाला है. आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने फ़ैसला वापस नहीं लिया तो फिर राज्य में बड़े पैमाने पर आंदोलन होगा.