निर्दोष लोगों के ख़िलाफ गोहत्या क़ानून का हो रहा दुरुपयोग: इलाहाबद हाई कोर्ट

by M. Nuruddin 1 year ago Views 1470

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश गोहत्या रोकथाम अधिनियम-1955 के लगातार दुरुपयोग पर कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की है। कोर्ट ने कहा कि निर्दोष लोगों के खिलाफ क़ानून का दुरुपयोग किया जा रहा है। यह बात हाई कोर्ट ने गोहत्या और गोमांस की बिक्री के कथित आरोपी रहमुद्दीन की ज़मानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कही।

कोर्ट ने कहा, ‘निर्दोष लोगों के खिलाफ क़ानून का दुरुपयोग किया जा रहा है। जब भी कोई माँस बरामद किया जाता है, तो बिना कोई फॉरेंसिक जांच किए उसे गाय का माँस (गोमांस) बता दिया जाता है। ज़्यादातर मामलों में तो जांच के लिए मांस भेजा ही नहीं जाता और आरोपी उस अपराध के लिए जेल में बंद रहते हैं जो संभत: किया ही नहीं।’


आरोपी के वकील ने कोर्ट को बताया कि गोमांस बेचने के आरोप में रहमुद्दीने एक महीने से जेल में बंद थे, यहां तक कि एफ़आईआर में उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं है। आरोपी के वकील ने कोर्ट को कथित रूप से यह भी बताया कि आरोपी को मौके से गिरफ्तार नहीं किया गया था। इसपर कोर्ट ने कथित आरोपी को एक व्यक्तिगत बॉन्ड जमा करने का आदेश दिया है और सशर्त ज़मानत दे दी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा, ‘जब गायें रिकवर की जाती हैं तो रिकवरी का कोई उचित मेमो तैयार नहीं किया जाता और किसी को यह भी नहीं पता कि रिकवरी के बाद गायें कहां जाती हैं। गोशालाओं में दूध नहीं देने वाली और बूढ़ी गायों को नहीं रखा जाता है और उन्हें भटकने के लिए सड़क पर छोड़ दिया जाता है। इसी तरह, दूध देने के बाद गायों के मालिक, गायों को खुला छोड़ देते हैं। गायों को नाली / सीवर का पानी पीने के लिए और कचरा, पॉलिथीन खाने के लिए छोड़ दिया जाता है।’

कोर्ट ने यह भी कहा, ‘सड़क पर भटक रही गाय और मवेशी यातायात के लिए भी ख़तरा है और इसकी वजह से कई सड़क दुर्घटना और मौतें भी दर्ज की गई हैं। ग्रामीण इलाकों में मवेशियों के मालिक जिनके पास खिलाने के लिए कुछ नहीं है, वो उन्हें छोड़ देते हैं। स्थानीय लोगों और पुलिस के डर से राज्य के बाहर नहीं ले जाया जा सकता। कोई चारागाह भी नहीं हैं। इस तरह ये जानवर फसलों को बर्बाद करने के लिए यहां-वहां भटकते रहते हैं।’

कोर्ट ने कहा अगर उत्तर प्रदेश गोहत्या रोकथाम कानून को बचाव की भावना के साथ लागू किया जाना है तो पहले गौशाला और उनके मालिकों के खिलाफ मवेशी छोड़ने को लेकर कार्रवाई की जानी चाहिए। वैसे, पहले भी गौ-हत्या और गौ-तस्करी को लेकर पुलिसिया कार्रवाई पर अलग-अलग कोर्ट सख्ती दिखा चुका है लेकिन ज़मीनी हालात है कि बदलने का नाम नहीं ले रहा।

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